नई दिल्ली: निजिकरण, घटते निवेश और मजदूरों से जुड़ी योजनाओं को लेकर बुधवार को देश की 9 केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है. कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त सेंटर ट्रेड यूनियन के मुताबिक इस बंद में देशभर के 25 करोड़ कर्मचारी हिस्सा लेंगे. संगठनों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि पिछले चार सालों में कोई लेबर कॉन्फ्रेंस नहीं हुई है. पिछली बार कर्मचारियों के हित में बनाए गए 12 प्वाइंट रोस्टर के साथ मंत्रियों के समूह के साथ मीटिंग हुई थी लेकिन ये भी साल 2015 की बात है. तब से लेकर अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

रिलीज में आगे कहा गया है कि सरकार गिरती अर्थव्यवस्था को रोकने में नाकाम साबित हो रही है और पब्लिक सेक्टर यूनिट को बेचने में लगी हुई है. इसके अलावा प्रकृतिक संपत्तियों को बेचने और बाकी दूसरी राष्ट्रीय संपत्तियों को लगातार बेच रही है. यही वजह है कि बुधवार को कर्मचारी संगठनों ने भारत बंद बुलाया है. भारत बंद 8 जनवरी दिन बुधवार को होगा.

सीआईटीयू के सचिव तपन सेन के मुताबिक भारत बंद की अवधि 24 घंटे की होगी जिसकी शुरूआत बुधवार सुबह 6 बजे से होगी. भारत बंद में विभिन्न संगठनों के करीब 25 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. भारत बंद के दौरान कर्माचारी 12 प्वाइंट रोस्टर को लागू करने की मांग करेंगे जिसमें शामिल होगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी की गारेंटी और सामाजिक सुरक्षा.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारतीय मजदूर संघ इस बंद में शामिल नहीं होगा. भारत बंद में शामिल संगठनों को सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने किसी भी तरह का बंद बुलाया तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे. श्रम मंत्रालय ने सभी सरकारी कर्माचरियों को आदेश जारी कर बंद में शामिल ना होने का आदेश जारी किया है. सभी वरिष्ठ अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वो बुधवार को किसी भी सरकारी कर्माचारी को छुट्टी ना दें.

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