रांची. तबरेज अंसारी की हत्या मामले में भीड़ के 13 आरोपियों में से छह को मंगलवार को एक अदालत ने जमानत दे दी है. झारखंड हाईकोर्ट की रांची पीठ ने तबरेज अंसारी डकैती मामले में छह आरोपियों को जमानत दे दी है. आरोपियों के वकील ने बताया कि अदालत ने कहा कि यह उस वीडियो से स्पष्ट नहीं है कि भीड़ में से किसके मारने के कारण तबरेज़ अंसारी की मौत हुई. झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले को उस समय प्रसिद्धि मिली जब तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग ने पूरे भारत में सुर्खियां बटोरीं. भीड़ द्वारा हत्या की घटना 17 जून. 2019 को हुई और धतकीडीह गांव में लोगों का पीटते हुए एक वीडियो आया जिसमें तबरेज़ अंसारी एक पोल से बंधा हुआ दिखा.

वीडियो में यह भी देखा गया कि तबरेज अंसारी को जय श्री राम और जय हनुमान का जाप करने के लिए मजबूर किया गया. 22 जून को तबरेज अंसारी ने दम तोड़ दिया. इस मामले में तेरह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया लेकिन बाद में पुलिस ने धारा को बदलकर 304 कर दिया. पुलिस ने लोगों के भड़कने और काफी आक्रोश के बाद धारा 302 को फिर से 13 आरोपियों के खिलाफ बहाल कर दिया गया. पुलिस विभाग द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि तबरेज अंसारी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जिन बिंदुओं पर विचार किया गया है, उनके कारण आरोपियों के खिलाफ धारा 302 का विरोध किया गया है.

वायरल वीडियो की सत्यता भी सही पाई गई है. वीडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं पाई गई और वीडियो में विजुअल की अखंडता पर कोई सवाल नहीं था. तबरेज़ अंसारी की मौत केवल कार्डियक अरेस्ट नहीं थी. उसकी खोपड़ी पर एक गंभीर चोट थी. उसके दिल के कोठरियों में खून भर गया था. उनके शरीर के अंग कमजोर हो गए थे और इन सभी के संयुक्त प्रभाव से कार्डिएक अरेस्ट हुआ. पुलिस को विरोध के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. 13 में से छह आरोपियों ने झारखंड उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी. अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि छह – भीमसेन मंडल, चामु नायक, महेश महाली, सत्यनारायण नायक, मदन नायक और विक्रम मंडल – 25 जून से जेल में थे.

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