नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में हर रोज सुनवाई हो रही है वहीं दूसरी ओर एक बार फिर से आपसी समझौते की कवायद शुरू हो गई है. मध्यस्थता समिति इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में बैठक कर रही है. इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्षकारों के साथ अलग-अलग बैठक हो रही है. हालांकि मध्यस्थता समीति की इस बैठक में रामलला विराजमान और हिन्दू महासभा ने समझौता वार्ता में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है.

वहीं निर्वाणी अखाड़ा समझौता के लिए बातचीत को राजी है. दूसरी तरफ शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने वीडियो जारी कर कहा है कि शिया वक्फ बोर्ड इस समिति का हिस्सा नहीं बनेगा क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सुन्नी वक्फ बोर्ड अब भी विवादित जगह पर बाबरी मस्जिद बनाने पर अड़ा है. जबतक सुन्नी वक्फ बोर्ड लिखित रूप में नहीं देता कि वो मंदिर बनाने के पक्ष में है तबतक वो किसी मध्यस्थता में शामिल नहीं होंगे.

दूसरी तरफ हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने भी वीडियो जारी कर कहा कि जो मध्यस्थता समिति बनी है उसमें हिंदू महासभा शामिल नहीं होगी क्योंकि हिंदू महासभा भगवान राम की जन्मभूमि का एक इंच भी नहीं देगा. उन्होंने कहा कि जमीन का समझौता तब होता है जब जमीन पूजनीय नहीं हो लेकिन उस जमीन पर भगवान राम ने अवतार लिया था तो उस जगह का कण-कण हमारे लिए पूजनीय है, इसलिए हिंदू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है. विष्णु शंकर जैन ने कहा कि रामलला विराजमान भी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि मध्यस्थता तभी होती है जब सारी पार्टियां इसके लिए तैयार हो.

निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता कार्तिक ने भी वीडियो जारी कर कहा है कि निर्मोही अखाड़ा ने तय किया है कि अब मध्यस्थता में जाने का कोई फायदा नहीं नहीं. कार्तिक ने कहा कि मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने काफी वक्त दिया था, उसमें कुछ नहीं हुआ और अब जब सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई चल रही है तो मध्यस्थता उचित नहीं है. उन्होंने साफ साफ कहा कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड को लगता है कि उनके दावों में दम नहीं है तो वो राम मंदिर पर अपना दावा छोड़ दें.

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