नई दिल्ली. अयोध्या रामजन्मभूमि – बाबरी मस्जिद पर आज सुप्रिम कोर्ट के फैसला आ जाने के बाद, अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रिम कोर्ट के 5 बेंचों के सदस्य ने राम मंदिर बनाने के लिए 3 महीने के भीतर ट्रस्ट बनाने को कहा है. अयोध्या में रामजन्मभूमि पर नागर शैली में राजस्थान के पत्थरों से भव्य राममंदिर का निर्माण होगा. राममंदिर प्रयोगशाला में सवा लाख पत्थरों की विशेष प्रकार की नक्कासी हो चुकी है. इतने पत्थरों से राम मंदिर का आधा ही निर्माण हो पाएगा. करीब इतने ही पत्थरों की जरूरत और होगी मंदिर निर्माण के लिए, तब जाकर भव्य मंदिर 2022 तक तैयार हो सकता है. ये सारी बातें राम मंदिर निर्माण प्रयोगशाला में कार्यरत शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने कही है.

शिल्पकार चंद्रकांत नें बताया कि हमारे कारीगरी को देखने के बाद ही आज से 30 साल पहले विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल ने राम मंदिर के निर्माण में प्रयोग होने वाली पत्थरों की कारगरी करने का काम मुझे सौंपा था. चंद्ररकांत सोमपुरा के मुताबिक भरतपुर, राजस्थान के बंसी डूंगरपुर गुलाबी पत्थरों से राम मंदिर का भव्य निर्माण किया जाएगा. इसमें करीब ढ़ाई लाख घनफीट पत्थर की आवश्यकता होगी. पिछले 30 सालों से अयोध्या, राजस्थान सहित कई स्थानों पर राम मंदिर निर्माण के लिए सामग्री का निर्माण चल रहा है.

अभी तक सवा लाख पत्थरों पर घड़ाई का काम पुरा कर लिया गया है. राम मंदिर के रूपरेखा के अनुसार और सवालाख पत्थरों की आवश्यकता होगी. सुप्रिम कोर्ट के फैसले के बाद अब तय हो चुका है कि रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवादित जमीन पर राम मंदिर का ही निर्माण होगा. इसलिए शिल्पकार चंद्रकांत का मानना है कि मंदिर के निर्माण ढ़ाई से तीन साल का समय लग सकता है.

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आइए जानते हैं राम मंदिर के निर्माण कार्य में 30 सालों से कार्यरत शिल्पकार कौन हैं– शिल्पकार 76 साल के चंद्रकांत सोमपुरा मूल रूप से गुजरात के पालीताणा से हैं. उनका परिवार कई पीढीयों से मंदिर निर्माण कार्य करता आ रहा है. वे खुद अब तक हिंदू, जैन व स्वामी नारायण संप्रदाय के 100 से अधिक मंदिर का निर्माण कर चुका है. इनमें गांधीनगर का स्वामी नारायण मंदिर, पालनपुर अंबा माता मंदिर और बिड़ला मंदिर प्रमुख है.

 

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