नई दिल्ली.  सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद केस में ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई में संविधान पीठ ने रामलला विराजमान के दावे को बरकरार रखा है. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन अलग से देने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि सरकार एक ट्रस्ट बनाए जो कोर्ट के आदेशों का अनुपालन सुुनिश्चित करे. कोर्ट ने रामलला विराजमान का मंदिर पर मालिकाने को मुहर लगा दी है. मंदिर का मालिकाना हक रामलला विराजमान के पास रहेगा. मस्जिद विवादित स्थल से दूर बनेगा. इस तरह जमीन विवाद के इस केस में रामलला विराजमान पक्ष की जीत हुई है. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 42 दिन तक चली रेगुलर सुनवाई के बिंदुओं का जिक्र किया. सीजेआई रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते वक्त कहा कि हिंदु और मुस्लिम दोनों यह मानते हैं कि अयोध्या में राम का जन्म हुआ. आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा कि विवादित स्थल पर गुंबद के नीचे मंदिर होने के सबूत मिले हैं. लेकिन मंदिर गिराकर मस्जिद बनाया गया इसका प्रमाण नहीं मिलता. सीजेआई ने भगवान राम के बारे में पेश किए गए ऐतिहासिक ग्रंथों का जिक्र किया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि टाइटल का फैसला सिर्फ आस्था के आधार पर नहीं हो सकता. जमीन के मालिकाना हक का फैसला आस्था और विश्वास के आधार पर नहीं किया जा सकता. 

बता दें कि इस मामले में कुल 14 पक्षकार थे. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की तमाम कोशिशों के विफल होने के बाद नियमित सुनवाई का फैसला किया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलों को सुुना. बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं ऐसे में उन्होंने इस फैसले को अपनी सेवानिवृति से पहले लिखने के लिए दिन रात एक कर दिया. कई सदी से चल रहे इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़ी हस्तियों ने लोगों से अदालत के फैसले को खुले दिल से स्वीकारने की अपील की. 

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