नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान मुसलमान पक्ष के वकील राजीव धवन ने ये कहकर कोर्ट में सनसनी फैला दी कि बाबरी मस्जिद को गिराने वाले लोग हिंदू तालिबानी थे. इस पर कोर्ट में मौजूद एक वकील भड़क गए तो चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने राजीव धवन को कोर्ट का डेकोरम और शब्दों की अहमियत बताते हुए कहा कि शब्दों का प्रयोग सोच-समझ कर करें. चीफ जस्टिस से गर्म बहस के बीच राजीव धवन ने सख्त लहजे में कहा कि वो कोर्ट की इस टिप्पणी से असहमत हैं और असहमति दर्ज करना उनका अधिकार है. इसके बाद कोर्ट ने राजीव धवन पर चिल्लाने वाले वकील को कोर्ट से बाहर जाने कह दिया.

राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि कोर्ट की संविधान पीठ के 1994 के फैसले पर फिर विचार करने की जरूरत है या नहीं. दरअसल सुप्रीम कोर्ट टाइटल सूट से पहले इस पहलू पर सुनवाई कर रहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं. कोर्ट ने ये कहा था पहले ये तय होगा कि संविधान पीठ के 1994 के उस फैसले पर फिर से विचार करने की जरूरत है या नहीं कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंट्रीगल पार्ट नहीं है. इसके बाद ही टाइटल सूट यानी जमीन के मुकदमे पर विचार होगा.

दरअसल 1994 में पांच जजों की पीठ ने राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था ताकि हिंदू पूजा कर सकें. पीठ ने ये भी कहा था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंट्रीगल पार्ट नहीं है. 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि पर फैसला देते हुए जमीन का एक तिहाई हिस्सा हिंदू, एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम और एक तिहाई हिस्सा रामलला को दिया था. मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस करते हुए राजीव धवन ने तालिबान द्वारा बुद्ध की मूर्ति तोड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि 1992 में जो बाबरी मस्जिद गिराई गई वो हिन्दू तालिबानियों द्वारा गिराई गई.

मुस्लिम पक्ष की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया गया कि सरकार को इस मामले में न्यूट्रल यानी तटस्थ भूमिका रखनी थी लेकिन उन्होंने इसको तोड़ने दिया. अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है. पिछली सुनवाई में शिया वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से कहा गया था कि हम इस महान देश में सौहार्द, एकता, शांति और अखंडता के लिए अयोध्या की विवादित ज़मीन पर मुसलमानो का हिस्सा राम मंदिर के लिए देने को राज़ी हैं. इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा था कि शियाओं का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और इस जमीन पर उनका कोई हक ही नहीं है कि वो इसे किसी को भी दान कर दें.

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