नई दिल्ली: अयोध्या राम जन्म भूमि मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान शिया वक़्फ़ बोर्ड ने फारुखी मामले को संविधान पीठ में भेजे जाने का विरोध करते हुए कहा कि हिंदू धर्म छोड़कर कहीं भी धर्म की व्याख्या नहीं की गई है, सिर्फ हिंदू धर्म में ही धर्म की व्याख्या है ऐसे में फारुखी मामले को लेकर जो बहस चल रही है, उसको संविधान पीठ में भेजने का कोई औचित्य नही है.

शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से ये भी कहा गया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण मीर बाक़ी द्वारा किया गया था. इसके बाद अयोध्या मामले के एक पक्ष ने कहा कि पहले ये तय हो कि विवादित स्थल पर मालिकाना हक किसका है, उसके बाद अगर कोर्ट को लगता है तो फारुखी मामले को देखें. ये भी तर्क रखा गया कि जहां तक नमाज का सवाल है तो वो घर, बैडरूम, ऑफिस, ट्रेन में कहीं भी पढ़ी जा सकती है.

1946 में ही फैसला हो गया था कि जमीन पर मालिकाना हक सुन्नी वक्फ बोर्ड का है- सुन्नी वक्फ बोर्ड

इस बीच सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की तरफ से कहा गया कि 1946 में ही ये फैसला हो गया था कि ज़मीन पर मालिकाना हक सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का है. शिया वक़्फ़ बोर्ड ने 2017 में 1946 के फैसले को चुनोती दी है. ऐसे में इस मामले में शिया वक़्फ़ बोर्ड का कोई लोकस नही है. सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने ये भी कहा कि वो शिया वक़्फ़ बोर्ड की बात का जवाब देना नही चाहते क्योंकि वो पक्ष है ही नही.

सुन्नी वक्फ बोर्ड के जवाब पर सवाल उठाते हुए शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि हम इस महान देश में सौहार्द, एकता, शांति और अखंडता के लिए अयोध्या की विवादित ज़मीन पर मुसलमानो का हिस्सा राम मंदिर के लिए देने को राज़ी हैं.

हिंदू तालिबानियों ने गिराई थी मस्जिद- मुस्लिम पक्ष

मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस करते हुए राजीव धवन ने तालिबान द्वारा बुद्ध की मूर्ति तोड़े जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें ये कहने में कोई संकोच नही कि कि 1992 में जो मस्जिद गिराई गई वो हिन्दू तालिबानियों द्वारा गिराई गई. मुस्लिम पक्ष की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए ये भी कहा गया कि सरकार को इस मामले में निष्पक्ष भूमिका रखनी थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और मस्जिद तोड़ने दिया.

राजीव धवन ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड वो दान कर रहा है जो उसके पास है नहीं. उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी आस्था को मस्जिद गिराने का अधिकार नहीं है और तथ्य ये है कि मस्जिद गिराई गई लेकिन प्रार्थना करने के अधिकार का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ. 20 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई होगी.

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