नई दिल्ली: अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सातवें दिन की सुनवाई शुरू हुई. रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन ने बहस की शुरुवात की. सीएस वैद्यनाथन ने नक्शा और रिपोर्ट दिखाकर कोर्ट को बताया कि विवादित ढांचे और खुदाई के दौरान मिले पाषाण स्तंभ पर शिव तांडव, हनुमान और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं. पक्का निर्माण में जहां तीन गुम्बद बनाए गए थे वहां बाल रूप में राम की मूर्ति थी.

एस सी वैधनाथ ने तर्क रखे कि अप्रैल 1950 में विवादित क्षेत्र का निरीक्षण हुआ तो कई पक्के साक्ष्य मिले। जिसमे नक्शे, मूर्तियां, रास्ते और इमारतें शामिल हैं. परिक्रमा मार्ग पर पक्का और कच्चा रास्ता बना था. आसपास साधुओं की कुटियाएं थी. सुमित्रा भवन में शेषनाग की मूर्ति मिली थी. पुरातत्व विभाग की जनवरी 1990 की जांच और रिपोर्ट में भी कई तस्वीरें और उनका साक्ष्य दर्ज है. 11 रंगीन तस्वीरे उस रिपोर्ट के अल्बम में हैं जिनमे स्तंभों की नक्काशी का डिटेल चित्रण और वर्णन है.

एस सी वैधनाथ ने ASI के रिपोर्ट वाले अल्बम की तस्वीरें, मेहराब और कमान की तस्वीरें भी कोर्ट को दिखाई जो 1990 में खींची गई थी. उसमें कसौटी पत्थर के स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि उत्कीर्ण है. तस्वीरों में भी साफ साफ दिखता है. कमिश्नर की रिपोर्ट में पाषाण स्तंभों पर श्रीराम जन्मभूमि यात्रा भी लिखा है. श्रीराम जन्मभूमि पुनरोद्धार समिति शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि वो प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा की याद में लिखा गया शिलालेख था.

-स्तंभों और छत पर बनी मूर्तियां, डिजाइन, आलेख और कलाकृतियां मंदिरों में अलंकृत होने वाली और हिन्दू परंपरा की ही हैं.

– मस्जिदों में मानवीय या जीव जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकती, अगर होती है तो वो जगह मस्जिद ही नहीं हो सकती.

– इस्लाम मे नमाज/प्रार्थना तो कहीं भी हो सकती है. मस्जिदें तो सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए ही होती है.

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि केवल नमाज अदा करने से वो जगह उनकी नही हो सकती जब तक वो आपकी सम्पति नही होती.

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा गायकी नमाज तो सड़कों पर भी होती है इसका मतलब ये तो नही कि सड़क आपकी हो गई.

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा 1990 की तस्वीर का हवाला देते हुए कहा गया कि इन तस्वीरों पिलर में शेर और कमल के चित्र है. इस तरह के चित्र कभी भी इस्लामिक परंपरा का हिस्सा नही हो सकता.

जस्टिस अशोक भूषण

– जस्टिस भूषण ने कहा कि 1950 में कमीशन द्वारा लिया गया फोटो 1990 में ली गई फोटो की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद हैं.

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन

– रामलला की तरह से कहा गया कि इसमें कोई विवाद नही की वहाँ पिलर मौजदू थे. रामलला विराजमान की तरफ से अभी हाई कोर्ट का आदेश पढ़ा जा रहा है जिसमें कोर्ट ने विवादित स्थल पर ASI को निरीक्षण करने को कहा था.

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि दूसरे मेटीरियल का कार्बन डेटिंग किया गया था.

जस्टिस बोबड़े

– जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हमनें शायद मूर्ति की कार्बन डेटिंग पूछी थी?

मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन

– मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि जस्टिस बोबड़े ने कहां पूछा था देवता की कार्बन डेटिंग हुआ है क्या? मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि ईंटो का कार्बन डेटिंग नही हो सकता. कार्बन डेटिंग तभी हो सकती है जब उसमें कार्बन की मात्रा हो.

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन

– रामलला की तरफ से कहा गया कि देवता की कार्बन डेटिंग नही हुई है.

लंच के बाद

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा कि एक गवाह की तरह से कहा गया था कि ईमारत बौद्ध धर्म से जुड़ा हो सकता है लेकिन ASI ने अपनी रिपोर्ट में इस सुझाव को खारिज कर दिया था.

जस्टिस चंद्रचूड़

जस्टिस चंद्रचूड़ ने रामलला के वकील वैधनाथन से कहा कि आप साबित कर कि बाबरी मस्ज़िद मंदिर या किसी धार्मिक ईमारत की उप्पर बनी है?

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन

– रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि विवादित स्थल की खुदाई से मिले पुरातात्विक अवशेष ये साफ पता चलता है कि ये किसी उत्तर भारतीय मंदिरों के स्थापतिय शैली वाले ही है.

– ये सिर्फ एक ढांचा ही नही बल्कि अनेक स्तंभों वाली विशाल मंदिर था

– रामलला के वकील ने ASI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में जो तथ्य दिए गए है उसके मुताबिक यहाँ दशवीं शताब्दी का एक भव्य मंदिर था जिसको बाबरी मस्जिद में तब्दील किया गया.

जस्टिस चंद्रचूड़

– जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा वहाँ एक कब्र भी मिली है उसका क्या मतलब है.

रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन

– रामलला के वकील ने कहा कि वो बहुत बाद कि है.

– विराजमान– बड़े पैमाने पर विशेषग्यों कि निगरानी में राम जन्म भूमि पर पुरातत्व विभाग ने खुदाई कि और यह भी स्पष्ट कर दिया कि कौन से पत्थर किस सदी के हैं।बड़ा ढांचा था विवादित मस्जिद के नीचे।

– रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि उत्तर से दक्षिण दिशा में 17 कतार थी सभी कतार में 5 स्तंभ थे..

– ASI की इस रिपोर्ट में इतने सबूत है जिससे साफ होता कि मस्जिद का निर्माण धार्मिक नहीं बल्कि बदनीयती से दूसरे धर्म को कुचलने के लिए किया गया था।

– वैधनाथन ने ASI की खुदाई और रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि जिस तरह का विशाल ईमारत नीचे मिलने के प्रमाण मिले हैं वो बताते हैं कि वहां एक विशाल मंदिर था, जो आम जनता के दर्शन के लिए था।

– रामलला विराजमान की तरफ सी एस वैधनाथन ने कहा कि सोमवार को वो ASI की रिपोर्ट पर बहस करने के बाद वो गवाहों के बयानों पर पक्ष रखेंगे. वैधनाथन ने कहा कि उन्हें अभी बहस के किये और 3 से 4 घंटे का समय चाहिए। सोमवार को भी रामलला की तरफ से पक्ष रखा जाएगा.

SC Hearing In Ayodhya Land Dispute Case Day 7 Written Updates: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई, रामलला विराजमान के वकील ने पेश की रिपोर्ट, कहा- गुंबद की खुदाई में मिली थी राम मूर्ति

Ayodhya Land Dispute Case SC Hearing Day 6 Written Updates: अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट में छठे दिन की सुनवाई पूरी, जानें किसने क्या कहा

Leave a Reply

Your email address will not be published.

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App