नई दिल्ली. महज 66 साल की उम्र में 24 अगस्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में बीजेपी और देश के बड़े नेता अरूण जेटली का निधन  हो गया. अरूण जेटली देश की राजनीति के कद्दावर नेता थे जिन्होंने जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को फर्श से अर्श तक की यात्रा तय करते देखा है. अटल बिहारी वाजपेयी हों या नरेंद्र मोदी, अरूण जेटली हर प्रधानमंत्री के विश्वस्त सिपहसलार थे. अरूण जेटली ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एक छात्र नेता के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी. अरूण जेटली एक स्टार छात्र नेता थे.  एक काबिल वकील और एक कुशल वक्ता के तौर पर अरूण जेटली छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति की सफल यात्रा के शानदार उदाहरण हैं. 

दिल्ली यूनिवर्सिटी: छात्र राजनीति, वकालत, डिबेट और जयप्रकाश नारायण
अरूण जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर कॉमर्स कॉलेज एसआरसीसी के छात्र थे. दिल्ली यूनिवर्सिटी में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में अरूण जेटली एक धारदार वक्ता के तौर पर मशहूर होने लगे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े अरूण जेटली 1974 में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष बने. दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) से बीकॉम करने के बाद डीयू के ही लॉ फैक्लटी से एलएलबी की. अरूण जेटली एक स्टार छात्र नेता था, शानदार डिबेटर थे. 1973 में जयप्रकाश नारायण और राज नारायण के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी मूहिम में अरूण जेटली बतौर छात्र नेता बड़ी भूमिका निभा रहे थे. जयप्रकाश नारायण ने नेशनल स्टूडेंट कमेटी ऑफ यूथ ऑर्गेनाइजेशन के संयोजक के तौर पर अरूण जेटली को चुना. इंदिरा गांधी ने जब देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी तब जेटली डूसू प्रेसीडेंट थे.19 महीने के लिए जेल में भी रहे. जेल से बाहर आने के बाद अरूण जेटली जनसंघ में शामिल हो गए.

अरुण जेटली दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसआरसीसी कॉलेज से बीकॉम के छात्र थे
(फोटो साभार. इंटरनेट)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैन इन क्राइसिस थे अरूण जेटली
नरेंद्र मोदी का नाम जब बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के तौर पर उछाला जाने लगा तो लालकृष्ण आडवाणी का खेमा इससे नाराज बताया गया. अरूण जेटली इस दौरान नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े मददगार बनकर सामने आए. अरूण जेटली ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने में बीजेपी और संघ के बीच कड़ी का किरदार निभाया. बीजेपी के अंदर सहमति बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई. इसके बाद जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो एक वक्त अरूण जेटली आधा दर्जन मंत्रालय संभाल रहे थे. किसी आपात स्थिति में कोई भी मंत्रालय खाली होता अरूण जेटली के प्रोफाइल में जुट जाता.

चाहे जीएसटी हो या नोटबंदी, अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर योजना को अमलीजामा पहनाया और मीडिया और सदन में अपने धारदार तर्कों से योजनाओं की वकालत भी करते रहे. नरेंद्र मोदी जब 2019 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो अरूण जेटली ने चिट्ठी लिखकर उन्हें मंत्रालय न दिए जाने की गुजारिश की थी. अरूण जेटली की तबीयत दिनो दिन खराब होती जा रही थी. अमेरिका के न्यूयॉर्क में भी उनका इलाज हुआ था. बीते काफी दिनों से वो एम्स दिल्ली में भर्ती थे. पिछले एक हफ्ते से उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी. यह एक दुखद संयोग है कि एक समय बीजेपी के दोनों सदनों के नेता रहे सुषमा स्वराज और अरूण जेटली ने दुनिया को अलविदा भी चंद दिनों के अंतराल में ही किया.

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