नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या मामले में रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को जमानत दे दी है. अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट ने 50 हजार रूपये के निजी मुचलके पर रिहा किया है. अर्नब गोस्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में दलील दी कि अन्वय नाइक की फर्म पिछले 7 सालों से घाटे में चल रही थी. उन्होंने ये भी कहा कि संभव है अन्वय नाइक ने पहले अपनी मां का कत्ल किया हो और फिर सुसाइड कर लिया हो. हरीश साल्वे ने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि सुसाइड मामला दोबारा ओपन करते हुए रायगढ़ पुलिस ने सही कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया.

हरीश साल्वे ने महाराष्ट्र सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने दुर्भावना के तहत अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ कुछ दिनों से मुहिम छेड़ रखी है. उन्होंने ये भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर महाराष्ट्र पुलिस ने अन्वय नाइक का मामला दोबारा खोला है. हरीश साल्वे ने कहा कि अर्नब ने अन्वय नाइक का पूरा बकाया चुका दिया था और इस मामले में अर्नब को फंसाने की कोशिश की जा रही है. हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस मामले को सीबीआई के सुपुर्द किया जाए. हरीश साल्वे ने ये भी कहा कि अर्नब गोस्वामी को जमानत दे दी जाती है तो कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा.

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अमित देसाई ने अर्नब की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले की निचली अदालत में सुनवाई चल रही है इसलिए सुप्रीम कोर्ट को अभी जमानत नहीं देनी चाहिए. अमित देसाई ने कोर्ट से कहा कि पुलिस ने इस मामले में कई सबूत हासिल किए हैं जिन्हें कोर्ट में पेश किया जाना है लिहाजा जमानत ना दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को जमानत देते हुए महाराष्ट्र सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारें किसी को टारगेट करती है तो यह न्याय का उल्लंघन है.

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