नई दिल्ली. सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज (8 जनवरी) को फैसला सुना दिया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के छुट्टी पर होने के कारण जस्टिस एसके कौल और जस्टिस कुरियन जोसफ ने फैसला पढ़ा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने से पहले सेलेक्ट कमिटी की सहमति लेनी चाहिए थी. कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार को झटका देते हुए आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला निरस्त कर दिया. कोर्ट ने फैसला में कहा कि वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बने रहेंगे लेकिन दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (DPSE) के तहत आने वाली प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस की सेलेक्ट कमिटी आलोक वर्मा मामले पर विचार करेगी, तब तक वह कोई नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे.

आलोक वर्मा की याचिका में मोदी सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सरकार ने वर्मा से सीबीआई चीफ के सारे अधिकार छीन लिए थे. मोदी सरकार ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर वर्मा व अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था. आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर तीन आदेशों को रद्द करने की मांग की थी. इसमें एक आदेश सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और दो केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी किए गए थे. आलोक वर्मा ने याचिका में कहा कि इस आदेश में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपने क्षेत्राधिकार का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने कहा कि फैसले में अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन किया गया है.

अस्थाना और वर्मा के बीच विवाद बढ़ता देख मोदी सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम चीफ नियुक्त कर दिया था. 6 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार, आलोक वर्मा और सीवीसी की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता फाली एस नरीमन ने कहा था कि अस्थाना और वर्मा के बीच लड़ाई रातों-रात नहीं हुई. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले कमिटी के पास जाना चाहिए था, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस होते हैं. यही कमिटी सीबीआई निदेशक का चयन करती है.

यहां पढ़ें Alok Verma Supreme Court Verdict Highlights:

Highlights

खड़गे बोले- सरकार के लिए सबक

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. यह सरकार के लिए सबक है. आज आप लोगों पर दबाव डालने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, कल कोई और करेगा. ऐसे में लोकतंत्र का क्या होगा?

मोदी सरकार पर बरसे केजरीवाल

आलोक वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. केजरीवाल ने कहा कि आलोक वर्मा की फिर से सीबीआई डायरेक्टर पद पर बहाली पीएम मोदी के लिए कलंक समान है. मोदी सरकार ने देश के सभी संस्थानों और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है. क्या सीबीआई डायरेक्टर को आधी रात गैरकानूनी तरीके से इसलिए नहीं हटाया गया, ताकि वे राफेल घोटाले की जांच न कर सकें.

कांग्रेस ने किया फैसले का स्वागत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया है. कांग्रेस ने ट्वीट कर लिखा कि शीर्ष अदालत का फैसला सरकार के लिए चाबुक की तरह है. उन्होंने गैरकानूनी तरीके से आलोक वर्मा को सीबीआई डायरेक्टर के पद से हटाया. सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को फिर से सीबीआई डायरेक्टर के पद पर बहाल कर दिया.

सीबीआई डायरेक्टर के पद पर आलोक वर्मा बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून के तहत सीबीआई डायरेक्टर को छुट्टी पर भेजे जाने का अधिकार नहीं है. इसे नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. कोर्ट के इस फैसले के बाद वर्मा सीबीआई डायरेक्टर के पद पर बहाल हो गए हैं.

आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला निरस्त

सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला निरस्त कर दिया. कोर्ट ने कहा कि वर्मा सीबीआई डायरेक्टर बने रहेंगे लेकिन वे नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे. पीएम, नेता विपक्ष और चीफ जस्टिस की सिलेक्ट कमिटी उनके मामले पर एक हफ्ते में विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने से पहले सिलेक्ट कमिटी से इजाजत लेनी चाहिए थी.

कुछ देर में कोर्ट सुनाएगा फैसला

कुछ देर में आलोक वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा. देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट से आलोक वर्मा को राहत मिलती है या कोर्ट नरेंद्र मोदी सरकार के छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को सही ठहराता है.रिपोर्ट्स के मुताबिक सीजेआई रंजन गोगोई आज छुट्टी पर हैं. लिहाजा जस्टिस एसके कौल और जस्टिस कुरियन जोसफ इस मामले में फैसला सुनाएंगे.

आलोक वर्मा ने कहा था...

7 दिसंबर को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा ने स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि उन पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली के गंभीर मामलों की जांच होनी चाहिए. दिल्ली हाई कोर्ट में एफआईआर निरस्त करने की मांग वाली अस्थाना की याचिका का विरोध करते हुए वर्मा ने कहा कि याचिका सुनवाई करने योग्य नहीं है और गलत तरीके से पेश की गई है. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि यह केवल उनकी(वर्मा) छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया है.

कांग्रेस ने साधा था निशाना

कांग्रेस ने भी इस मामले में मोदी सरकार को जमकर घेरा था. कांग्रेस ने पीएम मोदी, पीएमओ, सीवीसी के. वी. चौधरी और डीओपीटी पर आलोक वर्मा को साइडलाइन करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था. कांग्रेस ने कहा था कि राफेल डील की जांच के कारण वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया गया. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि मोदी सरकार और सीवीसी के बीच आधीरात को रची गई साजिश की पोल खुल गई है.

सीजेआई हो गए थे खफा

दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट पर अपने सामने सीलबंद लिफाफे में दाखिल किए गए आलोक वर्मा के जवाब के लीक होने पर नाराजगी जाहिर करते हुए केस की सुनवाई 29 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी थी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इसे लेकर काफी गुस्सा थे. गोगोई ने एक न्यूज पोर्टल पर वर्मा के जवाब के हिस्सों की खबर पब्लिश होने के बाद अपने आदेश में कहा कि "हम आज इस केस की सुनवाई के लिए तैयार नहीं हैं."

'न जाने कैसे खत्म होती लड़ाई'

महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा था कि मोदी सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है और अगर सरकार हस्तक्षेप नहीं करती तो भगवान जाने दो वरिष्ठ अधिकारियों की लड़ाई कैसे खत्म होती. वेणुगोपाल ने ये बातें पिछली सुनवाई में सीनियर एडवोकेट फली एस. नरीमन, कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और राजीव धवन के आरोपों के जवाब में कहा, जिन्होंने 29 नवंबर को वर्मा के अधिकार छीनने के सरकार की कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया था.

केंद्र ने दी थी यह दलील

नरेंद्र मोदी सरकार ने 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसने सीबीआई के दो वरिष्ठम अफसरों वर्मा और अस्थान के बीच दखल इसलिए दिया क्योंकि वे बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे. सीबीआई की विश्वसनीयता और अखंडता की रक्षा के लिए उन्होंने दखल दिया. सुप्रीम कोर्ट आज इस मामले पर फैसला करेगा कि वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने का मोदी सरकार का फैसला सही था या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर को सुरक्षित रखा था फैसला

सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच लड़ाई बढ़ने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने दोनों अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया था, जिसके बाद वर्मा ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट में लंबी बहस चली. कांग्रेस ने मोदी सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर 6 दिसंबर को आदेश सुरक्षित रख लिया था.

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