नई दिल्ली. सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का फैलना एक बात है क्योंकि आम लोग सच और झूठ का अंतर समझे बिना फेक न्यूज और फेक न्यूज का ही धंधा करने वाली साइटों की खबर धड़ाधड़ आगे बढ़ाने लगते हैं. पर अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा जो ना सिर्फ एक जिम्मेदार राजनेता हैं बल्कि देश की प्रमुख पार्टी अकाली दल के प्रवक्ता हैं और दिल्ली विधानसभा के विधायक भी, वो अगर आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चरित्र हनन के लिए बेबुनियाद झूठ फैलाने पर उतर आएं तो कोई क्या कर सकता है. विधायक सिरसा ने होर्डिंग लगाकर और ट्वीट करके बार-बार कहा है कि बेंगलुरू में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण के लिए जाने पर ताज होटल में अरविंद केजरीवाल ने सरकारी पैसे पर 80 हजार रुपए की शराब पी ली, होर्डिंग में दारू लिखा है. लेकिन सच्चाई ये है कि केजरीवाल ने ना तो दारू पी और ना ही पिए गए पानी, जूस या कोल्ड ड्रिंक्स का कुल खर्चा 80 हजार था.

सोशल मीडिया के तीन सबसे पॉपुलर फोरम हैं- फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सएप्प. ये तीनों फोरम वो जगह बन गए हैं जहां बेसिर-पैर की बातें होती है और कोई पूछता भी नहीं कि भाई ये बेहूदी बातें कहां से लाईं. ऐसा ही हुआ है दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में बेंगलुरू के ताज होटल के बिल पर. दो दिन से भाजपा समर्थक ट्रोल और ट्वीटर एक्टिविस्ट #DaarubaazKejri ट्रेंड करा रहे हैं.

बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए की अहम पार्टनर अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा होर्डिंग लगाकर कह रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल ने 80000 रुपए की दारू पी ली. इतना बड़ा झूठ और इतने सारे ट्वीट्स. एक के बाद एक ट्वीट, दारू का बोतल मुंह में लगाए केजरीवाल की फोटो, बाथ टब में बैठकर बीयर पी रहे केजरीवाल की फोटो, शराब की बोतलों के बीच घिरे केजरीवाल की फोटो, पता नहीं कौन हैं ये लोग जो इतनी निर्लज्जता से इतने सारे झूठ बोलते जाते हैं और वो बेरोक-टोक ट्रेंड हो जाता है. ऐसे ही थोड़े ना लोग कहते हैं कि पैसे पर ट्वीट और कमेंट करने के लिए ट्रोल आर्मी बैठी है.

मसला ये है कि कर्नाटक में कांग्रेस के समर्थन से 23 मई को जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे. ये तब हुआ जब उनसे पहले कुछ दिन के लिए सीएम रहे बीजेपी के नेता बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अपना बहुमत साबित नहीं कर सके. इस शपथ ग्रहण में देश भर के तमाम बीजेपी और एनडीए विरोधी मुख्यमंत्री और नेता को न्योता गया था जिनमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी थे.

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कर्नाटक में सरकार बनाने जा रही जेडीएस ने इन अतिथियों के रहने का इंतजाम बेंगलूरू के कुछ फाइव स्टार होटलों में किया जिनमें ताज होटल भी था. ताज होटल में अरविंद केजरीवाल के अलावा आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती समेत कई नेताओं को ठहराया गया.

एक सज्जन ने कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान लागू सूचना का अधिकार कानून का इस्तेमाल करके कर्नाटक के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में पहुंचे नेताओं पर सरकारी खर्च का हिसाब मांगा और सरकार ने हिसाब दिया जिसमें नंबर एक पर रहे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का टोटल बिल आया है 8.72 लाख. अगर आपको याद ना हो तो याद कर लें कि चंद्रबाबू नायडू ने बंगलोर पहुंचे तमाम विपक्षी नेताओं को लंच कराया था और उसकी फोटो सोशल मीडिया पर विपक्षी एकता के नाम पर वायरल हुई थी.

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चंद्रबाबू नायडू के बाद जिस नेता के होटल बिल की चर्चा हो रही है वो हैं आम आदमी पार्टी चलाने वाले पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिनका टोटल बिल आया है 1.85 लाख रुपया. बाकी बातें बाद में, सबसे पहले तो ये कि इनके कमरे का किराया टैक्स के साथ 32000 रुपया रोजाना था जिसमें वो दो दिन रुके.

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अब बात सिर्फ अरविंद केजरीवाल की जिनके नाम पर सोशल मीडिया पर शराब, बीयर, वाइन, व्हिस्की और ना जानें क्या-क्या नहीं उड़ेला गया है सोशल मीडिया पर. अरविंद केजरीवाल बेंगलुरू के ताज होटल में 22 मई की रात 10 बजे के बाद पहुंचे और 24 मई की सुबह 5 बजे के आसपास निकल गए. सही टाइम न्यूज में छपी तस्वीर से चेक कर लें. मुद्दे की बात वो नहीं है इसलिए उस पर चर्चा बेमानी है. उनके दो दिन रहने का खर्च 64000 रुपया हो गया. बाकी बचा पैसा खान-पान का है. खान-पान में क्या-क्या शामिल है, ये आप नीचे बिल में देख सकते हैं.

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अरविंद केजरीवाल के बिल में होटल वालों ने फूड, जूस और एयरेटेड बेवरेज तीन कैटेगरी में खर्च दिखाए हैं जो जाहिर तौर पर केजरीवाल ने अकेले नहीं डकारा होगा बल्कि उनके स्वागत में पहुंचे उनकी पार्टी या जेडीएस के नेताओं ने शिष्टाचार में उनके साथ खाया होगा. फूड का मतलब खाना होता है. जूस का मतलब फल के जूस होते हैं.

एयरेटेड बेवरेज का मतलब वो तमाम कोल्ड ड्रिंक्स होते हैं जिनको पीने के बाद डकार मारने की जरूरत या चाहत होती है जैसे कोका कोला, पेप्सी. इसमें कहीं भी बीयर, शराब, वाइन, व्हिस्की, स्कॉच, रम नहीं है. कायदे की बात तो ये भी है कि एयरेटेड बेवरेज के नाम पर जो खर्चा दिखाया गया है उस दाम पर ताज जैसे फाइव स्टार होटल में शराब की ग्लास ना पकड़ने मिले.

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और सबसे आखिर में सबसे बड़ी काम की बात. केजरीवाल समेत तमाम नेताओं के बिल पर सबसे ऊपर ही कम्प्यूटर की भाषा में कैप्स लॉक और हिन्दी में समझें तो मोटे-मोटे अक्षरों में ये लिखा हुआ है कि ये सारे बिल कर्नाटक सरकार वहन करेगी सिवाय शराब और लाउंड्री के खर्च के. होटल वालों ने ही बिल में लिख दिया है कि इस बिल में शराब और लाउंड्री के खर्चे कर्नाटक सरकार नहीं देगी और बिल में कहीं भी शराब या शराब जैसी किसी भी चीज का जिक्र नहीं है.

एेसे में दिल्ली विधानसभा में अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा जो अपनी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं वो कैसे झूठ फैला सकते हैं और उस झूठ का होर्डिंग बनवा सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने 80 हजार रुपए की शराब पी ली. बिल में एक भी जगह शराब या शराब जैसी किसी भी चीज का जिक्र तक नहीं है और सिरसा के साथ-साथ भाजपा समर्थक ट्रोल दो दिन से आसमान सिर पर उठाए हैं कि केजरीवाल ने 80 हजार रुपए की दारू पी ली.

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आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को आम जनता के पैसे खर्च करके कर्नाटक सरकार ने दारू पिलाया, इसका एक कच्चा-पक्का पर्चा तक किसी के पास नहीं है लेकिन दो दिन से ट्वीटर पर ट्रोल आर्मी लगातार ये बता रही है और लोगों को बरगला रही है कि केजरीवाल ने बंगलोर में 80 हजार रुपए की शराब आम लोगों के पैसे की पी ली. कोई इन सिरफिरों से पूछता नहीं कि सबूत क्या है.

इन्हें तो खबर भी तब लगी जब कर्नाटक सरकार का खर्च आरटीआई से सामने आया. सूचना और न्यूज का सोर्स तो ये आरटीआई है. इसमें तो कहीं भी शराब नहीं है तो अकाली विधायक सिरसा हों या उनके एनडीए की लीडर बीजेपी के समर्थक ट्रोल, ये सब शराब की बोतलें कहां से खोजकर लाए, ये बताने की जहमत भी कोई उठाएगा या फेक न्यूज की तरह फेक होर्डिंग बनवाकर केजरीवाल को दारूबाज ही बताएगा.

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