अहमदाबाद: जरा सोचकर देखिए कि आप दिन रात डॉक्टर बनने के सपने देखें और महज एक नंबर की वजह से आपका मेडिकल में एडमिशन ना हो तो आपको कैसा लगेगा? जाहिर है आप हताश होंगे, निराश होंगे, किस्मत को कोसेंगे या हो सकता है अवसाद में चले जाएं लेकिन वो कहते हैं ना कि लाइफ इज ऑल अबाउट सैकेंड चांस. ऐसी ही कहानी है अजय सोनी की जो आज गुजरात में कंस्ट्रक्शन किंग माने जाते हैं. बतौर अजय ‘मेरा जन्म एक संयुक्त निम्न आयवर्ग परिवार में हुआ, जहां मिली परवरिश आज उनके मूल्यों को जिंदा रखे हुए है.’ अजय कहते हैं कि वो समस्या की बजाय समाधान की तरफ फोकस करते हैं. उनका कहना है कि हमें भविष्य की जरूरतों को समझना, आज उसपर काम करना और अपने पीछे ऐसा अतीत छोड़ना जरूरी है जिसके लिए हम जाने जाते हैं.

अपनी शुरूआती जिंदगी के बारे में बात करते हुए अजय बताते हैं कि एल डी इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद उन्होंने नौकरी करने की ठानी और उसी दौरान राज्य सरकार ने नर्मदा डैम प्रोजेक्ट लॉन्च किया था जिसमें उन्हें 300 रूपये की सैलरी पर बतौर साइट ऑफिसर नौकरी मिल गई. जल्द ही अजय ने अपनी मेहनत और लगन से अपनी अलग पहचान बनाई और फिर एक ऐसा दिन भी आया जब अजय के पास एक ऐसा ऑफर आया जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि ये ऑफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा अवसर है या सबसे बड़ा रिस्क?

दरअसल साल 1992 में अजय को अहमदाबाद शहर के मिताकली सिक्स क्रॉस रोड़ पर मौजूद एक रेसिडेंशल प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप का ऑफर मिला. इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश की जरूरत थी जो अजय जैसे नौकरी पेशा युवा के लिए संभव नहीं था वहीं दूसरी तरफ उन्हें पता था कि अगर ये प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो उनका अपना ब्रैंड बन जाएगा. हालांकि इसमें रिटर्न का जोखिम भी था लेकिन अजय ने रिस्क लिया. अजय ने अपने एक रिश्तेदार से लोन लिया और उन्हें तय समय में अच्छे रिटर्न का वादा भी किया. फिर भी पैसा कम पड़ा तो उन्होंने अपनी मां की जमा पूंजी भी प्रोजेक्ट में लगा दी. हालांकि बाद में अजय की मेहनत रंग लाई और उन्होंने सबको वादे के मुताबिक अपने प्रोजेक्ट के फायदे में से रिटर्न दिया. अजय ने अपने पहले प्रोजेक्ट का नाम हरिवंशर रखा जो उनके दादा का नाम था. 

अजय आज कंस्ट्रक्शन बिजनेस में तीन दशक बिताने के बाद अहमदाबाद के जाने माने बिल्डर हैं. कंस्ट्रक्शन और रियल स्टेट की दुनिया में अजय सोनी का नाम है. अजय हमेशा भविष्य को देखते हुए अपने प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनाते हैं और उनकी टीम भी अजय के इसी फॉर्मूले पर काम करती है कि हमें ग्राहकों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से घर बनाकर देना है, इसलिए प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. अजय बताते हैं कि उनका प्रोजेक्ट किंग्स मारवेला उनका विजन प्रोजेक्ट है जिसका आइडिया उन्हें यूरोप दौरे के दौरान आया था.

अजय बताते हैं कि किंग्स मारवेला का कॉन्सेप्ट कम्यूनिटी बाइडिंग के बीच प्राइवेसी प्रदान करना है ताकि आप अपनी निजता के साथ-साथ समाज के साथ भी जुड़े रह सकें. अजय बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट से वो बहुत आकर्षित हुए खास तौर पर इस प्रोजेक्ट के ले आउट ने उनका सबसे ज्यादा ध्यान खींचा. अजय बताते हैं कि किंग्स मारवेला में कम बजट में आपको फुल फर्निश्ड घर मिलता है जिसमें आपका खुद का निजी लॉन है जहां बैठने की सुविधा है साथ ही आप वहां बारबीक्यू कॉर्नर भी है. इसके अलावा स्वीमिंग पूल के साथ-साथ तमाम छोटी-बड़ी सुविधाएं दी गई है. किंग्स मारवेला में कुल 120 युनिट हैं. अजय बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट में उनके दोस्त समीर शाह भी उनके साथ हैं और दोनों मिलकर इस प्रोजेक्ट को इस उद्देश्य के साथ चला रहे हैं कि लोगों को ऐसा अनुभव कराया जा सके जैसा उन्हें एक बार यूरोप जाने से होगा. 

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