नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में आरक्षण को लेकर कहा है कि सरकार देश के हित को ध्यान में रखकर उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण खत्म करें. जस्टिस दीपक मिश्रा और पीसी पंत की बेंच ने कहा कि स्पेशयलिटी कोर्सेस में चयन का पहला मापदंड मेरिट को बताने के बाद भी केन्द्र और राज्य सरकारें मेरिट की जगह आरक्षण को महत्व दे रहे हैं.
 
कोर्ट ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में सुपर स्‍पेशियलटी कोर्सेज में प्रवेश को लेकर योग्यता मानकों को चुनौती देने के संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह बात कही.
 
दो फैसलों का दिया हवाला
याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि वह 1988 में सुप्रीम कोर्ट के दिए दो फैसलों से सहमत है. इन दो फैसलों में मेडिकल संस्थानों में सुपर-स्पेशयलिटी कोर्स में दाखिले में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश के हित में कोई आरक्षण में नहीं होना चाहिए. इससे देश को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत सुधरेगी.
 
पीठ ने निर्णय देते हुए कहा कि उसे उम्मीद और विश्वास है कि केन्द्र सरकार और राज्यों की सरकारें इस पहलू पर बिना देरी किए गंभीरता से विचार करेंगी और समुचित दिशा-निर्देश देने की ओर बढ़ेंगी.
 
पीठ ने तीन राज्यों को लेकर दायर याचिका के संबंध में कहा कि वह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रवेश प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती क्योंकि राष्ट्रपति के आदेश को संवैधानिक रूप से चैलेंज नहीं किया जा सकता. हालांकि चार नवंबर को इस पर सुनवाई होगी कि तमिलनाडु में इस मामले में दखल दी जा सकती है या नहीं?

 

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