नई दिल्ली. 7th Pay Commission Latest News: केंद्र सरकार ने दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए (Dearness Allowance, DA) में 5 फीसदी की बढ़ोतरी का तोहफा दिया है. सरकार के इस फैसले से देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनधारकों को फायदा मिलेगा. पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बेसिक सैलेरी पर 12 प्रतिशत डीए मिलता था जिसे अब बढ़ाकर 17 फीसदी किया गया है. आइए जानते हैं कि महंगाई भत्या यानी डीए क्या होता है और यह देश की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है.

महंगाई भत्ता यानी Dearness Allowance जिसे शॉर्ट फॉर्म में डीए (DA) भी कहते हैं, यह कर्मचारियों को दिए जाना वाला जीवन खर्च होता है. जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती-घटती है वैसे-वैसे ही सरकारी कर्मचारियों का डीए भी घटाया या बढ़ाया जाता है. ताकि देश की महंगाई के अनुरूप कर्मचारियों को सामान खरीदने का खर्च मिलता रहे. एक सरकारी कर्मचारी के मासिक वेतन में डीए की भूमिका अहम होती है.

हाल ही में हुई डीए बढ़ोतरी का फायदा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 जुलाई 2019 से प्रभावी होगा. यानी कि अक्टूबर के वेतन के साथ पिछले तीन महीने जुलाई, अगस्त और सितंबर का डीए भी जुड़कर एरियर के रूप में मिलेगा.

सातवें वेतन आयोग के अनुसार जिन कर्मचारियों को वेतन मिल रहा है उनके डीए की गणना भारत- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर की जाती है. इसके लिए डीए केल्कुलेट करने का फॉर्मूला दिया गया है, जिसके बारे में आप इस खबर में विस्तार से जान सकते हैं-

महंगाई भत्ते में 5 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय कर्मचारी 3 महीने के एरियर के साथ डीए की ऐसे करें गणना

डीए से अर्थव्यवस्था पर ऐसे पड़ता है असर-
सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए देती है और मानती है कि कर्मचारी डीए से मिलने वाले पैसे को अपनी जरूरत की चीजों और घरेलू खर्च में उपयोग करेंगे. हालांकि कुछ कर्मचारी डीए की रकम से बचत भी करते हैं. यदि वे डीए की रकम को विभिन्न बचत योजनाओं में जमा करते हैं या अपने बैंक अकाउंट में भी रखते हैं तो निवेश बढ़ता है.

इससे बैंकिंग प्रणाली मजबूत होती है. बैंकों को पैसा मिलता है तो वे ज्यादा लोन देते हैं. लोन के जरिए उद्योग जगत में तेजी आती है. नतीजतन देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है.

वहीं यदि डीए का पैसा कर्मचारी बचत करने के बजाए खर्च भी करते हैं तो वही पैसा बाजार में आता है. उपभोक्ताओं की खर्च क्षमता बढ़ती है तो उद्योगों में उत्पादन भी बढ़ता है. इससे भी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है.

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