नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थक और एक इतिहासकार को इसलिए कॉलम लिखने से वंचित कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने मोहन भागवत समेत कई संघ प्रमुख के मीट खाने की बात को सार्वजनिक किया था. दिलीप देवधर  ने अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा है कि उनके मीट वाले बयान के बाद उनसे कॉलम नहीं लिखवाया जा रहा है. जबकि वह उस कॉलम को पिछले 16 साल से लिख रहे थे.
 
दरअसल संघ द्वारा मीट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर दिलीप देवधर  ने अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से कई महीने पहले बात करते हुए कहा था कि संघ के कई चीफ मीट खाते हैं. देवधर ने अखबार से  कहा था कि बालासाहेब देवरस और मोहन भागवत जैसे वरिष्ठ संघ नेता सरसंघचालक बनने से पहले मीट खाया करते थे.
 
 
इस बयान के बाद देवधर का 16 साल से लिखा जा रहे संघ समर्थक अखबार  तरुण भारत में  कॉलम रोक दिया गया है. इससे आहत होकर देवधर ने कहा है कि मैं संघ के दोहरेपन के खिलाफ हूं. मैं आलोचना करता हूं, लेकिन मेरे स्तंभ नकारात्मक नहीं हैं. वे सकारात्मक और रचनाशील हैं. 
 
देवधर ने कहा कि मांसाहार की बहस के बाद संघ की बदनामी हो रही थी इसलिए उन्होंने बयान दिया था कि संघ मीट खाने के खिलाफ नहीं है. देवधर ने कहा कि  उनके इस कदम की सरहाना भी की गई लेकिन जो लोग इसको समझ नहीं पाए वह नाराज हो गए.
 
 
खबर के मुताबिक नागपुर में हुई संघ की एक बैठक में संघ के रवींद्र जोशी ने इस बात को उठाया और देवधर से कॉलम छीन लिया गया. हालांकि अखबार ने कॉलम मामले में संघ के हस्तक्षेप से इनकार किया है.