चेन्नई.  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि श्रीहरिकोटा से ‘एस्ट्रोसैट’ का हुआ सफल प्रक्षेपण हो गया है. इसे अंतरिक्ष में भारत की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. 
 
इसरो ने भारत के एस्ट्रसैट सहित सात उपग्रहों को ले जाने वाले रॉकेट के प्रक्षेपण की 50 घंटे पूर्व उल्टी गिनती शुरू कर दी थी. ‘एस्ट्रोसैट’  की मदद से ब्रम्हांड को समझने में मदद मिलेगी. इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिना किसी बाधा के सफल प्रक्षेपण हो गया है. 
 
सोमवार सुबह प्रक्षेपित होने वाला यह रॉकेट अपने साथ 1,513 किलोग्राम वजनी 180 करोड़ रुपये की लागत वाले भारतीय एस्ट्रोसैट उपग्रह के अलावा अमेरिका के चार और इंडोनेशिया तथा कनाडा के एक-एक उपग्रहों को ले जाएगा. एस्ट्रोसैट को पृथ्वी से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया जाएगा.
 
28 सितंबर को रॉकेट के साथ छोड़े जाने वाले उपग्रहों में देश का पहला वेवलैंथ वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह ‘एस्ट्रोसैट’ भी शामिल है, जो ब्रह्मांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा. सोमवार को छह विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में 50 वर्ष पूरा कर लेगा. भारत अब तक 45 विदेशी उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर चुका है.  इसरो के मुताबिक, पीएसएलवी के प्रक्षेपण के लिए शनिवार की सुबह आठ बजे उल्टी गिनती शुरू की गई थी. 
 
IANS