5 Laws Of 2019 Modi Govt You Must Know: 2019 में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिन्हें ऐतिहासिक कहा जा सकता है. इन फैसलों का आप पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ना तय है. नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए और पारित  हो चुके पांच कानूनों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. राजनीति की गर्मागर्म बहसों में कई बार जरूरी मुद्दों से जनता का ध्यान हट जाता है (इन दिनों तो जानबूझकर ऐसी कोशिश भी की जाती है कि आपका ध्यान कहीं और हो और सरकार इस बीच अपना काम कर जाए.) अब जब साल 2019 खत्म हो रहा है, ये दशक भी खत्म हो रहा है. हम आपको ऐसे पांच कानूनों के बारे में बता रहे हैं जो इस साल आए या जिनमें ऐसे बदलाव हुए जिसका आप पर सीधा फर्क पड़ेगा. 

  1. RTI Amendment Act- सूचना का अधिकार कानून में हुआ संशोधन
  2. Electoral Bond- राजनीतिक दलों का नया आर्थिक मॉडल- इलेक्टोरल बॉन्ड
  3. Data Protection Bill- डेटा प्रोटेक्शन बिल से पड़ेगा आप पर सीधा असर
  4. POCSO Act- बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए मौत हुई मुकर्रर
  5. Citizenship Amendment Act- नागरिकता संशोधन कानून, भारतीयों पर असर नहीं लेकिन भारत पर?

RTI Amendment Act- सूचना का अधिकार कानून में हुआ संशोधन

सूचना अधिकार संशोधन विधेयक 2019 में मुख्यत: ये दो बदलाव हुए हैं.

1. मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त का कार्यकाल अब केंद्र सरकार निर्धारित करेगी. इनकी अधिकतम उम्र सीमा 65 साल होगी और कार्यकाल 5 साल का होगा.

2. मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के वेतन और भत्ते भी केंद्र सरकार निर्धारित करेगी. पहले यह नियम था कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के वेतन और भत्तों में चुनाव आयोग का नियम लागू होता था.

इन दोनों बदलावों से होगा क्या- अब केंद्र सरकार के हाथ में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की भर्ती, नियुक्ति, वेतन और भत्ते का अधिकार आ गया है. ऐसे में इनकी निष्पक्षता पर एक संकट तो खड़ा हो ही जाएगा. आगे आप खुद समझदार हैं.

Electoral Bond- राजनीतिक दलों का नया आर्थिक मॉडल- इलेक्टोरल बॉन्ड

इलेक्टोरल बॉन्ड यानी चुनावी बॉन्ड ऐक ऐसा बॉन्ड होता है जिसके ऊपर एक करेंसी नोट की तरह उसकी कीमत लिखी होती है. ये चुनावी बॉन्ड 1,000 रुपए, 10,000 रुपए, एक लाख रुपए, 10 लाख रुपए और एक करोड़ रुपए के मूल्य में उपलब्ध होंगे. यह बॉन्ड, व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों द्वारा राजनीतिक दलों को पैसा दान में देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सरकार का दावा है कि इससे पैसा देने वाली की गोपनीयता बरकरार रहेगी और चुनाव में काले धन पर अंकुश लगेगी. हालांकि क्विंट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार चाहे तो यह पता लगा सकती है कि किस दल को कितना धन मिला.

अब यह सच भी जान लीजिए कि भारतीय जनता पार्टी को वित्तीय वर्ष 2018-19 में 20,000 रुपये से अधिक के दान में 743 करोड़ रुपये मिले. यह राशि कांग्रेस समेत छह राष्ट्रीय दलों को प्राप्त हुई चंदे की राशि से तीन गुना अधिक है. कांग्रेस को चुनावी दान में इसी दौरान 147 करोड़ रुपये मिले.

Data Protection Bill- डेटा प्रोटेक्शन बिल से पड़ेगा आप पर सीधा असर

नरेंद्र मोदी सरकार 2019 में डेटा प्रोटेक्शन बिल लेकर आई. इस कानून में डेटा कलेक्शन, स्टोरेज, कोड ऑफ कंडक्ट और उल्लंघन की स्थिति में सजा जैसे प्रावधान हैं. सरकार ने डाटा को तीन भागों में- संवेदनशील, क्रिटिकल डेटा और सामान्य डेटा में बांटा है. कोई भी डेटा सिर्फ कानूनी कार्यवाही में लिया जा सकता है बाकि डेटा के उपयोग के लिए सहमति जरूरी होगी. इस कानून के तहत सरकार का यह भी कहना है कि जो डेटा भारत का होगा उस पर भारत का ही हक होगा. अब आपकी सहमति के बिना कोई आपका डेटा शेयर करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सकती है.

POCSO Act- बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों के लिए मौत हुई मुकर्रर

देश में बलात्कार और यौन हिंसा के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने पॉक्सो कानून को और कड़ा करने का फैसला किया है. विशेषकर बच्चों के साथ यौन अपराध करने वालों के खिलाफ नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं.  पॉक्सो अध्यादेश के मुताबिक, 12 साल से कम उम्र के बच्चों से रेप करने वालों को मौत की सजा दी जाएगी. वहीं, 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने वाले को दी जाने वाली कम से कम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल की गई है. दोषी को उम्रकैद भी हो सकती है.

Citizenship Amendment Act- नागरिकता संशोधन कानून, भारतीयों पर असर नहीं लेकिन भारत पर?

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बात सिर्फ इतनी सी है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता मिलनी अब आसान हो गई है. 2014 से पहले आए ऐसे सभी गैर मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिलनी आसान हो गई है. हालांकि इस कानून का देश भर में विरोध हुआ, कई लोगों की जानें गईं. इस कानून से किसी भारतीय पर तो सीधा फर्क नहीं पड़ता लेकिन संविधान की उस मूल आत्मा जरूर प्रभावित होती है जिसके केंद्र में पंथनिरपेक्षता है. 

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