लखनऊ: गोरखपुर हादसे पर प्रेस कॉन्फ्रेस करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ मुहिम की शुरुआत मैंने ही गोरखपुर से की थी और सीएम बनने के बाद बीआरडी कॉलेज का मैंने दो बार दौरा किया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी भी इस घटना से काफी चिंतित है. उन्होंने यूपी सरकार को आश्वस्त किया है कि सभी साहयता केंद्र की तरफ से की जाएगी. योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि मेरी पूरी संवेदनाएं उन सभी परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं. मीडिया में बच्चों की मौत को लेकर अलग-अलग आंकडे जारी हुए हैं. कोई कुछ आंकड़े बता रहा है और कोई कुछ. मौत के सही आंकड़े, लापरवाही किस स्तर पर हुई, क्या ऑक्सिजन मौत की वजह है? इसकी अधिकारियों ने जांच की है. हमने कल ही इस पर न्यायिक जांच के आदेश दे दिए थे.
 
 
यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे मंत्रियों ने गोरखपुर जाकर तथ्य इकट्ठा किए हैं. ऑक्सिजन सप्लायर की भूमिका की जांच पर कमिटी गठित की है. कुछ पर कार्रवाई हुई है और बाकी दोषी भी बख्शे नहीं जाएंगे. ऑक्सिजन की कमी से मौत का मामला जघन्य अपराध है. यूपी के 34 जिलों में इंसेफेलाइटिस का असर हुआ है. आप सब से मेरा आग्रह है कि एक संवेदनशील मामले में सही आंकड़े सामने आने चाहिए. बता दें कि गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में पिछले पांच दिनों के अंदर 63 बच्चों की मौत हो गई है, जिसकी वजह से पूरे जिले में हाहाकार मचा हुआ है. 32 मौते तो पिछले 48 घंटों में ही हुई हैं, उससे पहले भी तीन दिन के अंदर ही 28 बच्चों ने दम तोड़ दिया था. हालांकि प्रशासन इस बात को मानने से इनकार कर रहा है कि ये मौंते ऑक्सीजन की कमी से हुई हैं.
 
सरकार भले ही कह रही हो को ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत नहीं हुई लेकिन इंडिया न्य़ूज की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई. इंडिया न्यूज ने अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया तो पाया कि प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन की मात्रा जीरो थी. प्लांट में लगा मीटर इसकी गवाही दे रहा था. सूबे के चिकित्सा शिक्षा मंत्री और अस्पताल का दावा था कि ऑक्सीजन की कमी से मौतें नहीं हुई लेकिन प्लांट में ऑक्सीजन की मात्रा बताने वाले मीटर ने इस दावे की कलई खोल दी. अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद जब बच्चों की मौत होने लगी तो लखनऊ, फैजाबाद से आनन फानन में ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाकर हालात पर काबू की कोशिश हुई. बच्चों की मौत के बाद पता चला है कि अस्पताल को ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी ने पेमेंट न होने पर लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी. अस्पताल को ऑक्सिजन आपूर्ति करने वाली फर्म ने एक अगस्त को मेडिकल कॉलेज को चिट्ठी लिखकर 63 लाख के बकाए भुगतान ना होने पर ऑक्सीजन सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी.