नई दिल्ली: चंडीगढ़ छेड़छाड़ मामले की पीड़िता वर्णिका कुंडू ने इंडिया न्यूज/इनखबर से खास बातचीत में उस रात हुई पूरी घटना का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कैसे उनका पीछा किया गया और उन्हें लगभग अगवा करने की कोशिश की गई. बतौर वर्णिका ने चंड़ीगढ़ पुलिस पर दबाव है या नहीं के सवाल पर कहा कि मुझे लगता है कि पुलिस पर प्रेशर हो सकता है क्योंकि लड़के खुद को बचाने की कोशिश करेंगे.
 
वर्णिका ने सीसीटीवी फुटेज गायब होने के सवाल पर कहा कि हमें भी शक था कि फुटेज मीसिंग हो सकती है क्योंकि, सीसीटीवी फुटेज मिल जाता तो केस ओपन शट था. उन्होंने कहा कि मुझ पर किसी कोई दबाव नहीं है. केस में पुलिस की ओर से पहले धारा 341 जोड़ने और बाद में हटाने के सवाल पर वर्णिका ने कहा कि मैंने जो शिकायत की थी उसमें साफ था कि वो मुझे पकड़कर ले जाना चाहते थे, उस दौरान मेरे साथ जो-जो हुआ मैंने वैसा ही पुलिस को बता दिया. अब पुलिस की कार्रवाई चल रही है केस अभी खत्म नहीं हुआ है. मैं पुलिस के काम में इंटरफेयर कैसे करूं. ये काम पुलिस का है कि वो कि उसे कौन सी धारी लगानी है. 164 के तहत जिक्र नहीं किया कि अपहरण की कोशिश की गई के सवाल पर वर्णिका ने बताया कि एफआईआर में मैंने वो लिखा जो मुझे उस वक्त महसूस हुआ. वो लोग रास्ते भर मेरी गाड़ी रोकने की कोशिश करते रहे. दो बार मेरी गाड़ी तक आए, दरवाजा भी खोलने की कोशिश की. ये किडनैप करने का प्रयास ही था. मैंने मजिस्ट्रेट के सामने पूरा घटनाक्रम बताया. 
 
मेरी शिकायत केवल लड़कों के खिलाफ है
वर्णिका ने सवाल के जवाब में कहा कि मेरी शिकायत केवल उन लड़कों के खिलाफ है जो इसमें शामिल थे. उनके पिता क्या करते हैं मुझे बाद में पता चला, मुझे उनके कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं बस इतना चाहती हूं कि उन्हें ऐसी सजा मिले  जिससे की वे ये सबक सीख जाए कि आप किसी भी लड़की के साथ ऐसा सलूक नहीं कर सकते. 
 
पुलिस को क्या करना चाहिए मैं नहीं बताना चाहती
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के जवाब में वर्णिका ने कहा कि पुलिस ने मेरी मदद की है. मेरा साथ जिंदगी में ये पहली बार हुआ है. जिन लोगों को ये पता है कि पुलिस ने गलत किया है तो वो जानते होंगे, लेकिन मैं बिना कुछ जानते हुए कुछ नहीं कह सकती. अभी तक पुलिस अपना काम कर रही है. मैं ये नही बोलूंगी कि पुलिस को क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए, जब तक ये सिस्टम पूरी तरह से फेल नहीं होता तब तक मैं इसमें इंटरफेयर नहीं करना चाहती, मुझे भरोसा है कि एक दिन जस्टिस जरूर मिलेगा. 
 
फेसबुक का स्टेटमेंट मेरे लिए एडवांटेज 
वर्णिका से जब उनके फेसबुक स्टेटमेंट के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि फेसबुक का स्टेटमेंट और उसकी भाषा मेरे और मेरे दोस्तों के लिए हैं. हा लेकिन मेरे पास एडवांटेज हैं मैंने फेसबुक पर लिखा जो कि वायरल हो गया. 
 
मीडिया का सपोर्ट ना होता तो मैं ये ना कर पाती
वर्णिका ने मीडिया ट्रायल के सवाल पर कहा कि मुझे नहीं लगता कि मीडिया ने कुछ गलत किया है. मुझे जीतना सपोर्ट मीडिया और पूरे देश से मिला है मैं उसी के सहारे ही मैं यहां तक पहुंच सकी हूं, शायद ये सपोर्ट ना होता तो मैं यहां तक नहीं पहुंच सकती. मुझे नहीं लगता कि मीडिया ने कुछ गलत किया है. मीडिया ने केवल हाई लाइट किया है. जो मेरे साथ हुआ है वो किसी के साथ भी हो सकता है. 
 

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