भोपाल. मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के महान जंगल के अमिलिया गांव में महान संघर्ष समिति द्वारा सोमवार को लोकतंत्र महोत्सव आयोजन किया गया, इस मौके पर मौजूद लोगों ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को जनविरोधी करार देते हुए उसकी प्रति के टुकड़े कर जमीन में दफनाया और उस पर पौधारोपण किया. कोयला मंत्रालय द्वारा महान क्षेत्र की एक खदान को नीलामी सूची से हटा दिया गया है, इसे आंदोलनकारियों ने अपनी जीत करार दिया, लेकिन इसी जंगल क्षेत्र में कई दूसरे कोल ब्लॉक को नीलामी सूची से नहीं हटाया गया है.

जनसम्मेलन को संबोधित करते हुए महान संघर्ष समिति के सदस्य पानाथ यादव ने कहा कि महान जंगल में प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ लड़ते हुए हमने लगातार धमकियों, गैरकानूनी गिरफ्तारी और छापेमारी का सामना किया है. उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन का ही नतीजा है कि सरकार को हमारी बात माननी पड़ी और महान कोल ब्लाक को नीलामी सूची से बाहर करना पड़ा. अब हम सरकार से मांग करते हैं कि वन क्षेत्र के आसपास बसे गांवों को वनाधिकार कानून के तहत सामुदायिक वनाधिकार दिया जाए. हम आगे किसी भी परिस्थिति में फिर से कोयला खदान को आवंटित नहीं होने देंगे और जंगल का विनाश होने से बचाएंगे.

महान संघर्ष समिति की कार्यकर्ता और ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई ने कहा कि सरकार का यह फैसला लोकतंत्र की जीत है. यह लोगों के आंदोलन की जीत है. एक ऐसे समय में जब दिल्ली की केन्द्र सरकार लोगों के जंगल-जमीन को हड़पने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून में फेरबदल करना चाहती है, ऐसे में महान जैसे जमीनी आंदोलनों की अहमियत बढ़ जाती है. नियामगिरी आंदोलन के बाद महान की लड़ाई ने देश में दूसरी बार साबित किया है कि लोगों के आंदोलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इस संघर्ष ने देश भर के जनआंदोलनों को ताकत दी है.

राष्ट्रीय वन श्रमजीवी अधिकार मंच के गंभीरा भाई ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का विरोध किया और उन्होंने 2013 में पारित भू अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग की. जनसम्मेलन के अंत में महान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की प्रतियों को फाड़कर जमीन में दफनाया और उस पर आंदोलन के प्रतीक के रूप में पौधारोपण किया। इस महोत्सव में महान वन क्षेत्र में स्थित करीब 20 गांवों के सैंकड़ों ग्रामीण शामिल हुए. 

IANS

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