नई दिल्ली : दुनिया की सबसे बड़ी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाईजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने किसानों के लिए स्वास्थय सेवाएं मुहैया करवाने के मकसद से ‘ग्रामीण हेल्थ केयर’में निवेश किया है.
 
इस निवेश के बाद देशभर में ग्रामीण सेवा नेटवर्क तो बनेगा साथ ही उन्हें स्वास्थय सेवाएं भी मिल सकेंगी. इफको के इस कदम से 2020 तक 1 करोड़ से भी ज्यादा ग्रामीण आबादी इसका लाभ उठा सकेगी. इस पहल के पीछे का मकसद देश के वंचित समुदाय को स्वास्थय सुविधाएं मुहैया करवाना है. इसके अंतर्गत योग्य और अनुभवी पेशेवर ‘स्टीडफास्ट टेली मेडिसिन तकनीक प्लेटफार्म’ के जरिए आम जन तक सेवाएं पहुंचाते हैं.
 
शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों का अनुपात 6 गुना कम है. इस कमी के कारण 30 फीसदी ग्रामीण आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. इफको ‘ग्रामीण हेल्थ केयर’के साथ मिलकर इस फासले को कम करने का प्रयास कर रहा है. ये प्राथमिक सेवा केंद्र तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के ग्रामीण इलाकों में इफको बाजार के बिक्री केंद्रों में स्थापित किए जाएंगे.
 
इन केंद्रों के जरिए समय–समय पर महिला स्वास्थ्य, हृदय की बीमारियों, मधुमेह एवं आंखों की देखभाल की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. हर 10 प्राथमिक देखभाल केंद्रों पर 1 नर्सिंग सेवा केंद्र होगा, जिसमें जांच प्रयोगशाला, मूलभूत तथा विशिष्ट नर्सिंग की सुविधाओं के साथ भर्ती की व्यवस्था, विभिन्न किस्म के उपचार व अन्य चिकित्सा कार्यक्रम उपलब्ध होंगे. इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी का कहना है कि हमारा हर कदम किसानों की बेहतरी के लिए होता है. 
 
हमारे यह कदम किसानों को उत्तम स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने बताया कि इफको की स्वर्णजयंती के अवसर पर देशभर में 125 चयनित स्थानों पर विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जा रहे हैं. इफको के इस कदम की किसानों ने सराहना की है. इफको बाजार के प्रबंध निदेशक मनीष गुप्ता ने कहा कि इफको बाजार के बिक्री केंद्रों पर आने वाले किसानों के लिए यह एक अच्छी सौगात है. 
 
यहां किसानों को सामान्य स्वास्थ्य परामर्श और सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो सकेंगी. ‘ग्रामीण हेल्थ केयर’ के संस्थापक अजय खंडेरिया ने इस अवसर पर कहा कि ‘किसानों और ग्रामीण आबादी के बीच इफको एक भरोसेमंद नाम है, हम साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क खड़ा करना चाहते हैं, जिसके जरिए एक ही जगह पर किसानों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकेगा.
 
बता दें की अप्रैल के अंत तक पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए साल के अंत तक इसका फायदा लगभग 1 करोड़ लोगों को पहुंचा सकेंगे.
 

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