नई दिल्ली : पीएम मोदी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि आप देश के प्रधानमत्री पर बिना सबूत भष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं. इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि वो पीएम पर नहीं बल्कि गुजरात के तत्कालीन सीएम पर आरोप लगा रहे हैं. 
 
 
प्रशांत भूषण का कहना है कि उन्हें 1500 पेज के दस्तावेज मिले हैं. जिन्हें पढ़ कर अदालत में दाखिल करने में उन्हें काफी समय लगेगा. इसके लिए उन्हें 2 जनवरी तक का समय दिया जाए ताकि वो अदालत को और सबूत दे सके.
 
दस्तावेज दाखिल नहीं
 
कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पिछली सुनवाई में शांति भूषण और राम जेठमलानी ने सबूत होने की बात कही थी और दस्तावेजों को अदालत में दाखिल करने के लिए कोर्ट ने समय भी दिया था लेकिन अभी तक कोई भी दस्तावेज दाखिल नहीं हुआ है.
 
कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप बिना किसी सबूत के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं. सिर्फ दो लोगों में बातचीत होना और हवाला का पैसा जाना ही सबूत नहीं होता है.
 
सबूत बिना सुनवाई नहीं
 
कोर्ट ने कहा है कि सबूत के बुनियाद पर ही मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है और अगर सबूत नहीं है तो कोर्ट इस याचिका को खारिज कर देगी. वहीं प्रशांत भूषण द्वारा और समय मांगने पर कोर्ट ने कल तक का समय दिया है. अब शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई होगी.
 
 
बता दें कि प्रशांत भूषण की याचिका में आरोप लगाया है कि सीबीआई और इंनकम टैक्स की रेड में कुछ दस्तावेज मिले थे जिसमें करोडों की घूस के मामले में कई नेताओं और कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री के नाम सामने आए थे. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच SIT से कराए जाने की मांग की गई है. वहीं कोर्ट ने सीबीआई और आयकर विभाग से जब्त किए गए कागजातों को कोर्ट में लाने का निर्देश दिया है.