मुंबई. मुंबई हमले के मामले में सार्वजनिक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने एक खुलासा करते हुए कहा है कि हमले के दोषी अजमल कसाब ने कभी भी जेल में मटन बिरयानी की मांग नहीं की थी. उन्होंने कहा कि कसाब के पक्ष में भावात्मक लहर शुरु हो गई थी जिसे रोकने के लिए उन्होंने ये बिरयानी वाली बात गढ़ी थी. उन्होंने कहा, ‘मीडिया गहराई से उनके हाव भाव का निरीक्षण कर रही थी और उसे यह चीज अच्छे से पता थी एक दिन अदालत कक्ष में उसने सिर झुका लिया और अपने आंसू पोंछने लगा.’  इसके बाद चैनल पर चर्चाएं शुरु हो गई. निकम ने कहा कि इस तरह के भावात्मक माहौल को रोकने के लिए उन्होंने बिरयानी वाली बात को कहा था. निकम ने कहा कि  कसाब ने ना तो बिरयानी मांगी थी ना ही उसे वह परोसी गई थी.

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