नई दिल्ली. योग दिवस के विरोध में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड खुलकर आ गया है. लखनऊ में हुई बैठक में बोर्ड के सदस्यों ने तय किया है कि पीएम मोदी से मिलकर विरोध जताया जाएगा. बैठक में सरकार के काम काज पर भी चिंता जाहिर की गई.
  
योग का विरोध नहीं लेकिन जबरदस्ती नहीं करेंगे 
धर्म गुरू खालिद रशीद फिरंगीमहली ने मीडिया से बातचीत में कहा, “बोर्ड ने सिर्फ योग का विरोध करने की बात नहीं कही है. राजस्थान के स्कूलों में सरकारी तौर पर सूर्य नमस्कार को जरूरी करा दिया गया है. संविधान के मुताबिक आप किसी धार्मिक विश्वास को हर धर्म के लिए जरूरी करार नहीं दे सकते. जहां तक योग का मसला है तो हम लोगों ने इस बात का स्वागत किया है कि जिस तरह यूएन ने योग को अंतराष्ट्रीय दिन मनाने का फैसला किया. कई मुस्लिम देशों में भी यूएन ने भारत का फेवर किया है.” तौर पर मनाने का मौका दिया है. कई मुस्लिम देशों में भी
 
खालिद ने कहा, ” जहबे इस्लाम में आप अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं कर सकते. चांद सूरज सितारों की इबादत नहीं कर सकते. इस वजह से ये बात कही गई है. सिर्फ एक्सरसाइज है तो उसका विरोध नहीं है. जरूरत पड़ेगी तो हम प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगे.

21 जून को है योग दिवस 
आपको बता दें कि योग दिवस पर हुए विवाद के बाद अब 21 जून को योग दिवस के कार्यक्रम में सूर्य नमस्कार शामिल नहीं होगा.  रामदेव ने पहले ही साफ-साफ कहा है कि सूर्य नमस्कार 21 जून के योग दिवस के कार्यक्रम में नहीं है. योगगुरु रामदेव की इस बात पर केंद्र सरकार ने भी मुहर लगा दी है. केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने साफ-साफ कहा है कि 21 जून के योग दिवस पर सूर्य नमस्कार न कभी था और न है.
 
रामदेव ने कहा कि मजहबों के नाम पर भी बहुत तरह के वाद-विवाद सुनने को मिलते थे इसलिए इस पूरे पैकेज में सूर्य नमस्कार को सम्मिलित ही नहीं किया गया है. दरअसल योग दिवस में सूर्य नमस्कार को लेकर मुस्लिम नेताओँ को एतराज था.. एमआईएम के सांसद असदउद्दीन ओवैसी कह चुके हैं कि योग में सूर्य नमस्कार शामिल होता है जबकि इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत की इजाजत है. रामदेव ने इस पर कहा, “क्योंकि सूर्य नमस्कार को ऐसा लगता है कि लोग सूर्य नमस्कार को प्रणाम कर रहे हैं.. कुछ लोगों में भ्रांति हो गई ये सूर्य को प्रणाम है. सूर्य नमस्कार एक नाम है.”

IANS से भी इनपुट 

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