नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्नी के सेक्स से इंकार करने के बाद तलाक को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने कहा है कि बिना कारण लाइफ पार्टनर एक छत के नीचे रहते हुए भी अगर लंबे समय तक बगैर किसी ठोस कारण के सेक्स संबंध बनाने से इंकार करती है तो यह मेंटल क्रुएलिटी के दायरे में होगा. इस आधार पर तलाक हो सकता है.
 
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कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता पति ने ये साबित किया है कि उसकी पत्नी ने एक छत के नीचे रहते हुए भी बिना किसी उचित कारण के लंबे समय तक सेक्स संबंध बनाने से इंकार किया.
 
 
अदालत ने कहा कि महिला किसी शारीरिक अक्षमता की भी शिकार नहीं थी और ऐसे में क्रुएलिटी के ग्राउंड पर पति के फेवर में तलाक की डिक्री पारित की जाती है. 
 
HC ने SC के आदेशों का हवाला दिया
 
हाई कोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट्स का भी हवाला दिया और कहा कि ये सेटल प्रोविजन है कि अगर पार्टनर (पति या पत्नी) को सेक्सुअल रिलेशन से मना करता है तो ये अपने आप में मेंटल क्रुएलिटी है. 
 
कोर्ट ने कहा कि सेक्स शादी का फाउंडेशन है. और सौहार्दपूर्ण सेक्सुअल एक्टिविटी के बिना शादी लंबे समय तक चलना असंभव है. कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि बिना किसी ठोस कारण के दंपति द्वारा एक दूसरे को सेक्स के लिए मना करना अपने आप में मेंटल क्रुएलिटी है और कानून में इसकी व्याख्या है. 
 
 
मौजूदा मामले में महिला ने अपने पति को शारीरिक संबंध के लिए इजाजत नहीं दी. दोनों एक छत के नीचे लंबे समय से रह रहे थे लेकिन साढ़े चार साल तक पत्नी ने अपने पति को सेक्सुअल रिलेशन की इजाजत नहीं दी.
 
इस मामले में पति ने जो आरोप लगाया उस पर पत्नी की ओर से इंकार नहीं था. ऐसे में साफ है कि याचिकाकर्ता पति ने इस बात को साबित किया है कि उसकी पत्नी ने सेक्स संबंध से इंकार किया जबकि वो साढ़े चार साल तक एक छत के नीचे रहे और इस दौरान संबंध बनाने से इंकार किया. अदालत ने कहा कि बिना कारण सेक्स से इंकार करना क्रुएलिटी है और इस आधार पर पति की तलाक की अर्जी स्वीकार की जाती है. 
 
निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
 
याचिकाकर्ता पति ने इस मामले में दिल्ली की निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई जिसमें निचली अदालत ने तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी. पति ईएसआई हॉस्पिटल में कार्यरत है.
 
अर्जी के मुताबिक दोनों की 26 नवंबर 2001 को शादी हुई थी शादी के बाद दो बच्चे थे. लेकिन बाद में पत्नी का कंडक्ट ठीक नहीं रहा और उसके पैरेंट्स के साथ व्यवहार ठीक नहीं था. इसी कारण पैरेंट्स को उसने अलग रेंट पर घर लेकर दे दिया.
 
 
याचिकाकर्ता पति का आरोप है कि इसके बावजूद पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं था. साथ ही उसने ये भी आरोप लगाया कि पत्नी ने एक छत के नीचे रहते हुए साढ़े चार साल तक संबंध बनाने  की  इजाजत नहीं दी और इसके लिए कहने पर उसने गाली गलौच की थी. हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने इन तथ्यों को नजरअंदाज किया.
 
सास-ससुर से अच्छा नहीं था व्यवहार
 
हाई कोर्ट ने कहा कि महिला के ससुर का बयान है कि वह अलग रेंट पर रहते थे. उनके बेटे ने उन्हें बहू के रोजाना  के व्यवहार के कारण अलग रहने के लिए रेंट पर मकान दिलाया था. कोर्ट ने कहा कि पति का आरोप है कि उसके साथ पत्नी संबंध नहीं बनाती थी. निचली अदालत ने इन तथ्यों को नजरअंदाज किया और इस आधार पर पति की तलाक की अर्जी स्वीकार कर ली.