नई दिल्लीः  6 दिसंबर, 1992 का दिन जब राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के चलते  विवादित ढांचा ढहा दिया गया था. 6 दिसंबर, 2017 को इस घटना के 25 साल पूरे होने पर गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए कदम उठाने को कहा है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी. गृह मंत्रालय ने ये सलाह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की है. इस एडवाइजरी में राज्यों से अपने यहां शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए 2008 में जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक कदम उठाने के लिए कहा गया है. आगामी 8 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले की सुनवाई होनी है. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा वाली 3 जजों की बेंच कर रही है. 5 दिसंबर को बाबरी विध्वंस मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों के वकील कपिल सिब्बल ने 2019 में होने वाले आम चुनाव के बाद इस केस की सुनवाई की मांग की.

बता दें कि शिवसेना और विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) 6 दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ के रुप में मनाता है. देशभर में ‘शौर्य दिवस’ को लेकर करीब 200 आयोजन किए जाते हैं. लेकिन इस बार वीएचपी की तैयारी इसको बहुत बड़े स्तर पर मनाने की है. जानकारी के मुताबिक, वीएचपी इस बार ‘शौर्य दिवस’ पर करीब दो हजार जगहों पर आयोजनों की तैयारी में है. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से राज्य में सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं. साथ ही अयोध्या और उसके आसपास के इलाकों में मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.

विवादित बाबरी विध्वंस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद की जानी चाहिए. कपिल सिब्बल ने इसका कारण बाबरी मुद्दे का एनडीए के चुनावी एजेंडे में शामिल होना बताया है. साथ ही ये भी कहा है कि ये मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है. सिब्बल ने कहा कि इस मामले के दस्तावेज भी अभी अधूरे हैं, इस लिहाज से 5 या 7 जजों वाली बेंच इस मामले की सुनवाई करें.

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