हैदराबाद. रोहित वेमुला आत्महत्या मामले में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के बाद रोहित की मां राधिका ने दावा किया है कि रो​हित ने कभी दलित के ताैर पर आरक्षण का लाभ नहीं उठाया. उन्होंने न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई. वहीं, एक अंग्रेजी अखबार ने रोहित की दादी के साक्षात्कार को आयोग की रिपोर्ट गलत साबित करने के लिए प्रमाण के तौर पर भी दिखाया है.
 
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गुरुवार को आई आयोग की रिपोर्ट में कहा गया था कि रोहित वेमुला ​के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया और उसने आत्महत्या का कदम ‘व्यक्तिगत निराशा’ की वजह से उठाया था. जस्टिस रूपनवाल आयोग ने यह भी कहा है रोहित की मां राधिका ने खुद को माला समुदाय से इसलिए बताया ताकि बेटे रोहित को जाति प्रमाणपत्र मिल सके. 
 
रिपोर्ट में कहा गया था कि राधिका का ये दावा कि उनका पालन करने वाले माता-पिता ने उन्हें बताया कि उनके जैविक माता-पिता दलित थे, यह अविश्वसनीय लगते हैं. बिना माता-पिता का नाम जाने बिना उन्हें दलित होने का कैसे पता चला. 
 
क्या कहा रोहित की दादी ने 
अब अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने रोहित वेमूला की दादी के इंटरव्यू में हुई बातचीत के आधार पर आयोग के दावे को गलत बताया गया है. अखबार के अनुसार 14 फरवरी को इंटरव्यू में राधिका की मां अंजनी देवी ने बताया था कि उन्होंने 45 साल पहले राधिका को एक माला परिवार से गोद लिया था. उनके माता-पिता रेलवे ट्रैक पर काम करते थे. उनके माता-पिता गरीब थे. बिना पूछे मुझे पता चल गया था वो माला समुदाय से हैं… जिसकी मैंने बाद में पुष्टि की थी. 
 
रोहित वेमूला की दादी की मृत्यु 23 फरवरी को हो गई थी. देवी ने आगे बताया है कि राधिका के साथ उनके रिश्ते उसकी शादी के पांच साल बाद खराब होने लगे. तब राधिका ने माला समुदाय को जाति के तौर पर अपनाने का फैसला किया. 
 
वहीं, राधिका की मां ने आयोग की रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर करते हुए बयान दिया कि रोहित ने कभी आरक्षण का लाभ नहीं लिया था. वह हमेशा अनारक्षित श्रेणी से आवेदन​ किया था. उन्होंने आरोप लगाया की रोहित की आत्महत्या के कारणों का पता लगाने की बजाए मामले को जाति की तरफ ले जाया रहा है. 
 
क्या था मामला
बता दें कि 17 जनवरी को रिसर्च स्कॉलर रहे रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी. जिसके बाद पूरे देश में केंद्र सरकार के खिलाफ दलितों के साथ भेदभाव करने के आरोप में प्रदर्शन हुए थे. इन विरोध प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी और बीजेपी को भी निशाने पर लिया गया था.  
 
इस पूरे मामले पर संसद में भी बहस हुई थी. रोहित की मौत के बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से पूरे मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग गठन किया गया था.