नई दिल्ली. चीन के साथ बलुचिस्तान और गिलगित के पास आर्थिक कॉरीडोर बनाने में जुटा पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारत ने भी तैयारी शुरू कर दी है. ईरान और अफगानिस्तान के साथ मिलकर भारत अब नया आर्थिक ब्लॉक बनाने जा रहा है. 
 
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इस नए समूह में बांग्लादेश और श्रीलंका को भी शामिल किया जाएगा. इसके अलावा इसमें दक्षिण एशिया के कई दूसरे देशों को भी शामिल किया जाएगा. गौरतलब है कि चाबहार को लेकर कुछ दिन पहले ही ईरान और अफगानिस्तान से बात हुई है. 
इसी बैठक में भारत भी शामिल था. जिसमें प्रस्ताव दिया  गया कि क्यों न तीनों देश मिलकर एक नए आर्थिक क्षेत्र को बनाएं जिसमें पड़ोसी देशों को भी शामिल किया जाए.  भारत की ओर से दिए गए इस सुझाव पर दोनों देशों ने सहमति जताई और तय किया गया कि तीनों देश इस पर जल्दी दिल्ली में मिलेंगे. 
 
सार्क देशों भी होंगे शामिल
आतंकवाद के मुद्दे पर सार्क समूह के सदस्य देश जैसे, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश ने भारत का समर्थन किया. इतना ही नहीं इस्लामाबाद में आयोजित सार्क की बैठक का बहिष्कार किया उससे उम्मीद है कि ये देश भी इस नए समूह में शामिल हो जाएंगे.
 
अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान को घेरने की तैयारी
अफगानिस्तान के साथ मिलकर भारत अब पाकिस्तान को विश्वा व्यापार संगठन में भी घेरने की तैयारी कर रहा है.  भारत और अफगानिस्तान इस बात की शिकायत करेंगे कि पाकिस्तान उनके द्विपक्षीय कारोबार में अड़चनें डाल रहा है और दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात के लिए रास्ता नहीं दे रहा है. अभी पाकिस्तान सिर्फ आफगानिस्तान को ही भारत में सामान भेजने के लिए रास्ता दे रहा है. जिसकी वजह से भारत दो लाख टन गेहूं अफगानिस्तान नहीं भेज पा रहा है. 
 
भारत में होगी हार्ट ऑफ एशिया समिट
पाकिस्तान आने वाले समय में खुद को और अलग-थलग महसूस करेगा जब अमृतसर  में हार्ट ऑफ एशिया नाम से आयोजित एक बैठक होगी. जिसका उद्घाटन अफगानिस्तान के राष्टपति अशरफ गनी करेंगे. मिली जानकारी के मुताबिक इसमें 14 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और कई देशों के विदेश मंत्रियों के भी शामिल होने की संभावना है. 
 
दक्षिण एशिया में बढ़ेगी भारत की हनक
कूटनीति के मामले में भारत की सफलता अब दिखने लगी है. पाकिस्तान को छोड़ अब कई देश भारत के साथ ही अपना भविष्य देख रहे हैं. उनको अब चीन का भी साथ नहीं पसंद आ रहा है. कुल मिलाकर भारत दक्षिण एशिया में एक नए नायक तौर पर उभर रहा है जिसके साथ अब कई देश जुड़ना चाहते हैं.