नई दिल्ली. उरी हमले के बदले में भारतीय सेना ने बीती रात जिस तरह पाकिस्तान में घुसकर 38 आतंकियों को मार गिराया है. इसके बाद पाकिस्तान आगबबूला हो गया. भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान न्यूक्लियर टेक्टिकल वेपन्स का इस्तेमाल कर सकता है, जैसा कि आज उसका एक बयान भी आया है.

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यह बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान पूरी तरह से परमाणु हथियार पर ही निर्भर है. यह भी बात पाकिस्तान अच्छी तरह से जानता है कि भारत के साथ युद्ध में उसका क्षेत्रफल और सेना का कोई मुकाबला नहीं है. उसके पास कम दूरी की न्यूक्लियर टेक्टिकल वेपन्स (टीएनडब्ल्यू) हैं, जो भारत को नुकसान पहुंचाएंगे.
 
भारत के पास 110 तो पाकिस्तान के पास 120 परमाणु बम हैं
हाल ही में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 110 परमाणु बम हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120 परमाणु बम हैं. इनमें उसके पास कई न्यूक्लियर टेक्टिकल वेपन्स हैं जिसका तोड़ शायद ही भारत के पास है. न्यूक्लियर टेक्टिकल वेपन्स को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी खतरनाक बताया है. साथ ही पाकिस्तान ने हाल ही में साठ किलोमीटर तक मार करने वाली नश्र (हत्फ-9) जैसी कम दूरी की मिसाइयों जैसे परमाणु हमले की क्षमता हासिल की है.
 
क्या है न्यूक्लियर टेक्टिकल वेपन्स?
टीएनडब्ल्यू मिसाइल की मारक क्षमता पूर्व में अंडमान से लेकर पश्चिम में इसराइल तक है. टीएनडब्ल्यू सुरक्षा के लिए बेहद ही खतरनाक है, लेकिन यह विपक्षी सेना के कुछ ही टैंक को बर्बाद कर सकता है. यदि पाकिस्तान टीएनडब्ल्यू का इस्तेमाल करता है तो भारत इसके बदले में पाकिस्तान के कई बड़े शहरों को तबाह कर सकता है. हालांकि समस्या यह है कि पाकिस्तान टीएनडब्ल्यू को अंतिम विकल्प नहीं मान रहा, बल्कि इसे सीमा से भारतीय सेना को हटाने के लिए कर सकता है जिससे खतरा बढ़ गया है.
 
 
पाकिस्तान जहां अपने टीएनडब्ल्यू के लिए प्रिफरेंशियल एक्सेस लिंक (पीएएल) विकसित कर रहा है. ये सॉफ्टवेयर कोड इन हथियारों के परिचालन को चुनिंदा कमांडरों तक सीमित रखते हैं. ऐसे में खतरा यह है कि युद्घ क्षेत्र में पैदा होने वाले भ्रम की स्थिति में ये हथियार अनधिकृत लोगों के हाथ भी लग सकते हैं. ऐसी परिस्थितियां असुरक्षा और अनिश्चितता पैदा करती हैं.
 
 
पाकिस्तान के टीएनडब्ल्यू दागन के फैसले पर भारत का कोई खास नियंत्रण नहीं है, लेकिन भारत को इसके लिए तैयार रहना होगा. वैसे भारत का परमाणु सिद्घांत अगस्त 1999 में जारी किया गया था और 2003 में उसमें मामूली संशोधन किया गया और कहा गया कि भारत परमाणु हमले की पहल नहीं करेगा लेकिन अगर उसका प्रतिरोध नाकाम रहता है तो वह तीखी प्रतिक्रिया देगा.