रांची. झारखंड में बुधवार को सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल से लोगों का बुरा हाल रहा. लोग इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे और उन्हें दवाइयां भी नहीं मिल सकीं. राजधानी रांची में अस्पताल से लेकर पंचायतों में प्राथमिक स्वास्थ्य उप केंद्र में मरीज रोते-बिलखते रहे लेकिन डॉक्टर इलाज करने के लिए राजी नहीं हुए. 
 
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राज्य में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, डायनामिक एसीपी नहीं मिलने और डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस बंद करने के सरकार के निर्देश के विरोध में 1200 सरकारी डॉक्टर तीन दिनों 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल पर हैं. इस कारण पीएचसी से लेकर छोटे-बड़े सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज व्यवस्था ठप हो गयी है.
 
वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश
हड़ताल के कारण सदर अस्पताल के ओपीडी में लोगों की भीड़ लग गई. यहां दवाइयां भी नहीं बांटी जा रही हैं. अस्पतालों में कुछ डॉक्टर आए लेकिन उन्होंने मरीजों का इलाज करने से इनकार कर दिया।  ऐसे में बिना इलाज कराए मरीजों को लौटना पड़ा। जो मरीज गंभीर हालत में थे, उन्हें रिम्स भेज दिया गया.
 
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के मद्देनजर सभी डीसी को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही डॉक्टरों की मांग पर विचार किया जा रहा है. 

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