नई दिल्ली. उरी हमले के बाद पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने की भारत की कोशिशें सफल होती दिख रही हैं. भारत के बाद अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान के सार्क सम्मेलन में शामिल होने से इनकार करने के बाद इस्लामाबाद में होने वाला 19वां सार्क सम्मेलन रद्द हो गया है. सार्क का मौजूदा अध्यक्ष नेपाल जल्दी ही इसकी आधिकारिक घोषणा करेगा क्योंकि अभी नेपाल के विदेश मंत्री और सार्क के महासचिव देश से बाहर हैं. 
 
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा है कि किसी भी सदस्य देश के सार्क सम्मेलन में आने से इनकार के बाद शिखर सम्मेलन नहीं हो सकता है. बीबीसी की खबर के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सार्क बैठक आगे बढ़ाने की पुष्टि की है.
 
अगली जगह तय करने की कोशिश में भारत
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की यह बैठक इस्लामाबाद में नौ-दस नवंबर को होने वाली थी. सार्क शिखर सम्मेलन, दक्षिण एशिया के आठ देशों के राष्ट्राध्यक्षों की होने वाली बैठक है. जो हर दो साल में आयोजित होती है. आठ में से चार सदस्यों ने इस बार सम्मेलन में शामिल होने से मना कर दिया है.
 
हालांकि, भारत इस कोशिश में है कि इस्लामाबाद में बैठक रद्द होने के साथ ही सार्क प्रमुखों की अगली बैठक की जगह तय हो जाए. सार्क सम्मेलन के रद्द होने से पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने की भारत की इस मुहिम को सफल माना जा रहा है. 
 
बांग्लादेश और अफगान ने किया पाक का विरोध
सार्क सचिव को भेजे गए बाग्लादेश के संदेश में कहा गया है कि एक देश द्वारा बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों में बढ़ते हस्तक्षेप ने ऐसा माहौल बना दिया, जो 19वें ​सार्क सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अनुकूल नहीं है. इसके चलते बांग्लादेश इस सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएगा. 
 
अफगानिस्तान की ओर कहा गया कि थोपे गए आतंकवाद के कारण हिंसा में बढ़ोतरी से राष्ट्रपति की जिम्मेदारी और बढ़ गई है और वह शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएंगे. भूटान, जो सीधे तौर पर पाकिस्तान आधारित गुटों के आतंकवादी हमलों से प्रभावित नहीं है लेकिन फिर भी उसने सम्मेलन में शामिल होने में असमर्थतता जताई है. वह साउथ ब्लॉक के साथ एकजुटता दिखाना चाहता है. 
 
बता दें कि उरी हमले में 18 जवान शहीद होने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है. इसके चलते ही भारत ने मंगलवार को सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने से मना कर दिया था. भारत के फैसले के बाद अफगानिस्तान, भूटान और बांग्लादेश ने भी सम्मेलन का बहिष्कार किया है.