नई दिल्ली.  नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की सीमा पर शहादत देने वाले बीएसएफ, आईटीबीपी जैसे पारा मिलिट्री फोर्स के जवानों को भी सेना के जवानों की तरह ‘शहीद’ का दर्जा देने का फैसला किया है.
 
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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राजनाथ सिंह ने पारा मिलिट्री फोर्स की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को नीतिगत तौर पर मंजूरी दे दी है. प्रक्रियाओं के पूरा होते ही देश की रक्षा में सीमा पर प्राण न्यौछावर करने वाले अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी सेना के जवानों की तरह शहीद का दर्जा हासिल करेंगे.
 
आपको बता दें कि अभी तक यह दर्जा सिर्फ सेना के जवानों को ही दिया जाता रहा  है. जबकि बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी के जवान जो शांति और सुरक्षा के लिए सबसे पहले वही मैदान में कूदते हैं उनको यह सम्मान नहीं दिया जाता था.
 
सीमा पर सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी बीएसएफ के जवानों की होती है. युद्ध की स्थिति में दुश्मन की पहली गोली इसी फोर्स के जवान झेलते हैं.  लेकिन अभी तक शहीद का दर्जा न दिए जाने से जवानों और उनके परिवार के लोगों में काफी आक्रोश था.

इस मांग को वह अब तक केंद्र में आई हर पार्टी की सरकार से कर चुके हैं. लेकिन उनकी इस गुहार पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. वहीं मोदी सरकार के इस फैसले के बाद से शहीद हो जाने पर जवानों के परिवार को कई तरह की सुविधाएं और सम्मान मिलेगा. 
 

वन रैंक, वन पेंशन पर स्थिति साफ नहीं
केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद पैरा-मिलिट्री फोर्स के जवानों को सेना की तरह सुविधाएं तो मिलेंगी. लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इन जवानों को वन रैंक, पेंशन के दायरे में लाया जाएगा नहीं.