नई  दिल्ली.   ऐसा पहली बार है कि नीति आयोग (पहले योजना आयोग) देश के रक्षा क्षेत्र के लिए भी योजनाएं तैयार कर रहा है. नीति आयोग इस समय भारतीय नौसेना को मजबूत करने और हिंद महासागर में आर्थिक हितों के लिए प्लान तैयार करने में जुटा हुआ है. 
 
इनख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
इसके तहत केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत घरेलू प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके अलावा हिंद महासागर में खनन और कई आर्थिक कामों में भी तेजी लाई जाएगी. दैनिक जागरण अखबार में छपी खबर के मुताबिक संभावित खतरों जैसे युद्ध, समुद्री लुटेरे, तस्करी, व्यापार और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार की जा रही हैं.
आयोग की योजना में नौसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए घरेलू तकनीकी का सहारा लिया जाएगा. नीति आयोग ने पूरी योजना को तीन भागों में बांटा है जिसमें दस वर्षीय विजन दस्तावेज, सात वर्षीय रणनीतिक दस्तावेज और तीन वर्षीय कार्ययोजना शामिल है.
क्यों महत्वपूर्ण है ये योजना
आपको बता दें कि भारत के कुल व्यापार का 90 फीसद समुद्री मार्गों पर निर्भर है. भारत के पास 75 हजार किमी की तटीय सीमा है. 1300 से अधिक द्वीप और 20 लाख किमी से अधिक विशेष आर्थिक जोन हैं. भारत के लिए ये ब्लू इकोनॉमी हर लिहाज से महत्वपूर्ण है.
शिपिंग उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
शिपिंग उद्योग के मामले में भारत दक्षिण कोरिया, चीन और जापान से पीछे हैं. विश्व में वह 17 वें नंबर पर आता है. जबकि उसके पास हिंद महासागर जैसी बड़ी तट सीमा है. इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए टैक्स में छूट में देनी होगी. 
देश में ऐसा पहली बार
इससे पहले योजना आयोग को सामरिक या रक्षा क्षेत्र की य़ोजना तैयार करने का अधिकार नहीं था. लेकिन नीति आयोग की इस नए प्लान से कई बड़े परिवर्तन और आने वाले समय में प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.