नई दिल्ली.  भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में इस दोनों देशों के एक बीच हुए इस करार पर सवाल उठाए गए हैं.

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यह याचिका वकील एमएल शर्मा की ओर दी गई है जिसमें कहा गया है कि 1960 में सिंधु नदी के पानी के बंटवारे को लेकर हुई संधि असंवैधानिक है. इस समझौते पर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हस्ताक्षर हैं.
 
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस याचिका पर जल्द सुनवाई की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह संधि 1960 से अब तक चली आ रही है. वहीं याचिकाकर्ता एमएल शर्मा का कहना है कि ऐसा करने पर मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ सकता है. उनके इस तर्क पर कोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा है कि राजनीति से कोर्ट को दूर रखिए. इस पर हम सामान्य तरीके से हुई सुनवाई करेंगे. 
 
गौरतलब है कि उरी हमले के बाद से पूरे देश में गुस्से का माहौल है. हर जगह इसी बात की चर्च हो रही है कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत सरकार क्या कदम उठाने जा रहा है. इस संधि की समीक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से एक अहम बैठक भी आज बुलाई गई है. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिस्सा लेंगे.
 
क्या ये समझौता
1960 में भारत- पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर एक संधि हुई थी. इसे सिंधु जल समझौता कहा जाता है. इस संधि पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के अयूब खान ने दस्तखत किए थे.
जिसके मुताबिक सतलुज, ब्यास, रावी, सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों के पानी का दोनों देशों के बीच बंटवारा होगा. संधि के मुताबिक सतलुज, ब्यास और रावी का पानी भारत के हिस्से में आता है वहीं सिंधु, झेलम और चेनाब का ज्यादातर पानी पाकिस्तान को मिलता है.
सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी पर नियंत्रण भारत का है. इन तीन नदियों से ही पाकिस्तान में कई सिंचाई प्रोजेक्ट चल रहे हैं.