नई दिल्ली. सुरक्षाबलों के हाथों 8 जुलाई को मारा गया हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के पिता ने अपने बेटे के बारे में कई बातें बताईं. उन्होंने बुरहान के भारतीय सेना में शामिल होने और क्रिकेटर बनने की बात भी कही. साथ ही उन्होंने यूएन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण की भी तारीफ की. 
 
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स आॅफ इंडिया को दिया एक इंटरव्यू में मुजफ्फर वानी ने ये सब खुलासे किए. उन्होंने बताया कि जब बुरहान 10 साल का था तो भारतीय सेना में शामिल होना चाहता था और परवेज रसूल की तरह क्रिकेटर भी बनना चाहता था.
 
उन्होंने बताया कि बुरहान ने 5 अक्टूबर 2010 को घर छोड़ दिया था. उसने अपनी मां से कहा था कि वह अपने दोस्तों से मिलने जा रहा है लेकिन वह उस शाम नहीं लौटा. इसके बाद उनकी अपने बेटे से दो या तीन मुलाकातें ही हुईं, वो भी सिर्फ 2-3 मिनट के लिए. मुजफ्फर वानी ने यह भी बताया कि उन्होंने बुरहान के एनकाउंटर से दो महीने पहले उसे घर वापस आने के लिए मनाने की पूरी कोशिश की थी लेकिन वो नहीं माना. 
 
लेकिन, मुजफ्फर वानी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण में बुरहान को आतंकी के बजाए युवा नेता कहने की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘जब भगत सिंह अंग्रेजों के ख‍िलाफ लड़ रहे थे तो उन्हें आतंकी कहा जाता था, लेकिन भारतीय उन्हें स्वतंत्रता सेनानी ही कहते थे. जब कश्मीर समस्या सुलझ जाएगी तो भारत मानेगा कि बुरहान फ्रीडम फाइटर था. नवाज शरीफ ने जो कुछ भी कहा, मुझे अच्छा लगा.’
 
भारत के लिए खेलना चाहता था 
उन्होंने बताया कि बुरहान जब 10 साल का था तो उसने भारतीय सेना के एक अधिकारी से कहा था कि वो भारतीय सेना ज्वॉइन करना चाहता था. उसके एक वीडियो से क्रिकेट को लेकर उसका प्यार भी दिखता है. वो भारत के लिए खेलना चाहता था, पाकिस्तान के लिए नहीं.
 
श्री श्री रविशंकर के साथ हुई अपनी मुलाकात पर भी मुजफ्फर वानी ने बात की. वह कुछ वक्त पहले रविशंकर से मिलने उनके आश्रम गए थे लेकिन इसकी काफी आलोचना हुई थी. इस पर उन्होंने कहा कि यह मिलना पहले से तय नहीं था. वह अस्पताल गए थे तो सोचा कि आश्रम में ही रुक जाएं. 
 
श्री श्री से मुलाकात को सही ठहराया 
मुजफ्फर वानी बताते हैं, ‘मैंने कई सालों पहले श्री श्री को टीवी पर देखा था. मुझे यह पता चला कि डॉक्टर जाकिर नाइक उनसे मिल थे. तो मैं क्यों नहीं मिल सकता? हमने कश्मीर मुद्दे पर बात की और उन्होंने मुझसे समाधान के बारे में पूछा. मैंने कहा कि भारतीय नेताओं को पाकिस्तान से जरूर बात करनी चाहिए.’
 
उनसे पूछा गया कि बुरहानी की मौत के बाद क्या कश्मीर के युवाओं को हथियार उठा लेने चाहिए और सुरक्षाबलों के खिलाफ लड़ना चाहिए. इस पर मुजफ्फर वानी कहा कि बिल्कुल नहीं. सबसे अच्छा तरीका के है कि भारत और पाकिस्तान आपस में बातचीत करें.