नई दिल्ली. आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जन्मदिन है. उन्होंने अपने जीवन के 84 वर्ष पूरे कर लिए हैं. उनका जन्म 26 सितंबर 1932 को हुआ था. मनमोहन सिंह एक प्रधानमंत्री के साथ-साथ अर्थशास्त्री के तौर पर भी विख्यता हैं. अर्थशास्त्र संबंधी उनकी उपलब्धियों को आज भी याद किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनको बधाई दी है. उन्होंने मनमोहन सिंह से बात करके उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं.
 
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मनमोहन सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत के गह, पंजाब में हुआ था. उनकी माता का नाम अमृत कौर और पिता का नाम गुरुमुख सिंह था। देश के विभाजन के बाद सिंह का परिवार भारत चला आया. यहां उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। फिर उन्होंने आॅक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डी. फिल. भी किया. डॉ॰ सिंह के परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं.
 
डॉ॰ सिंह ने अर्थशास्त्र के शिक्षक के तौर पर बहुत ख्याति अर्जित की. हालांकि, प्रधानमंत्री के तौर पर यूपीए के दूसरे कार्यकाल में उनकी काफी आलोचना हुई. विश्वभर में मंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के डगमाने से उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. उन्हें एक डमी पीएम का नाम भी दे दिया गया. लेकिन, अर्थशास्त्री के तौर पर उनकी उपलब्धियों को हमेशा याद रखा जाएगा, जिनका जिक्र नीचे किया गया है. 
 
पढ़ें ये 10 खासियतें
1. मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय और फिर प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर रहे हैं. मनमोहन सिंह ने मशहूर अर्थशास्त्री रॉल प्रिबिक्स के साथ काम किया है। 1966 और 1969 के बीच मनमोहन ट्रेड एंड डेवलेपमेंट की यूएन कॉन्फ्रेंस के दौरान रॉल से मिले थे। 
 
2. वर्ष 1971 में वह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मन्त्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किये गये। इसके बाद उन्हें वर्ष 1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। 
 
3.जब रिजर्व बैंक आॅफ ​इंडिया ने रुपयों के लिए मॉनिटरी पॉलिसी बनाई थी, मनमोहन सिंह भी उस टीम का हिस्सा थे। वह वर्ष 1976 में आरबीआई के डायरेक्टर बने थे और फिर वर्ष 1982 में उन्हें आरबीआई का गर्वनर बनाया गया।
 
4. डॉ. सिंह भारत के आर्थिक सुधारों के प्रणेता माने जाते हैं. वर्ष 1991 में जब वह वित्त मंत्री  थे, तो ​उस समय दुनिया भर में आर्थिक मंदी का दौरा था. तब उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए भारत को लाइसेंस राज से मुक्त किया. जिसके कारण भ्रष्टाचार और लालफीताशाही में कमी आई. वह भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की ओर ले गए. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था ने तेजी से विकास किया. 
 
5. साल 2004 में उन्हें कांग्रेस के नेतृत्व में बनी यूपीए सरकार तरफ से प्रधानमंत्री बनाया गया। साल 2009 में बतौर प्रधानमंत्री फिर चुनाव जीतकर वो दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने।
 
6. डॉ. सिंह के प्रधानमंत्री और पी. चिदंबरम में वित्त मंत्री रहते भारतीय अर्थव्यवस्था ने 8 से 9 फीसदी की विकास दर पाई. वर्ष 2007 में भारत ने 9 प्रतिशत की उच्चतम ​जीडीपी वृद्धि दर हासिल की और विश्व की तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था बनी. 
 
7. प्रधानमंत्री रहते हुए भी मनमोहन सिंह ने भारतीय बाजार में वृद्धि को प्रोत्साहित किया और सफलता प्राप्त की. 
 
8.  मनमोहन सिंह की किताब इंडियाज एक्सपोर्ट ट्रेंड्स एंड प्रोस्पेक्ट्स फॉर सेल्फ सस्टेंड ग्रोथ भारत की अन्तर्मुखी व्यापार नीति की पहली और सटीक आलोचना मानी जाती है।
 
9. डॉ. सिंह ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने लोकसभा चुनाव में कभी जीत हासिल नहीं की. साल 2004 तक यह परंपरा थी कि प्रधानमंत्री जनता का प्रतिनिधि होता है इसलिए उसे लोकसभा से सदन में आना चाहिए। एक बार उन्होंने दिल्ली से चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए। इसके बावजूद उन्होंने देश का नेतृत्व किया।
 
10. विपक्ष में होने के बावजूद भी मनमोहन सिंह की तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से अच्छी दोस्ती थी. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल डॉ. सिंह को काफी पसंद करते हैं। ओबामा ने तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खास दोस्त भी कहा था। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भी कई मौकों पर मनमोहन से अपनी दोस्ती स्वीकार कर चुके हैं।