नई दिल्ली. इशरत जहां मुठमेड़ मामले में दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय की शिकायत पर गायब हुई फाइलों को लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि नॉर्थ ब्लॉक स्थित गृह मंत्रालय के ऑफिस से फाइलें गायब हैं. पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धारा 409 यानि क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है.
 
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गृह मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी वीके उपाघ्याय की तरफ से 26 अगस्त को  दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत में कहा गया था कि 15 जून 2004 को गुजरात के अहमदाबाद में चार लोग अमजद अली, जीशान जोहर, जावेद शेख और इशरत जहां को पुलिस की मुठभेड़ में मार दिया गया था. इसके बाद गुजरात हाइ कोर्ट में इशरत की मां शमीमा कौशर ने याचिका लगाकर इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की और उनसे ये भी कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से उन्हें पूरा मुआवजा भी दिया जाएगा.
 
 
ऐसे हुआ था एनकाउंटर
इस ऑपरेशन में तीन राज्यों की पुलिस, खुफिया एजेंसी आईबी, एक पुलिस कमिश्नर, एक ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर, एक डीसीपी और दो एसीपी समेत पूरी पुलिस टीम शामिल थी. एनकाउंटर के वक़्त इशरत की उम्र महज़ 19 साल थी और वो मुंबई के मुंब्रा में गुरु नानक खालसा कॉलेज से बीएससी कर रही थी. 
 
 
पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक 15 जून को अहमदाबाद के एंट्री प्वाइंट नारोल से नीले रंग की एक इंडिका कार गुजरी. एक खुफिया इनपुट के आधार पर तत्कालीन एसीपी एनके अमीन ने इस कार का पीछा करना शुरू कर दिया. अमीन को बताया गया था कि इस कार के अंदर चार आतंकवादी मौजूद हैं और ये लोग नरेंद्र मोदी की हत्या करने के लिए आए हैं. 
 
 
पुलिस की कहानी के मुताबिक कुछ देर तक उसका पीछा करने के बाद अमीन और उनके साथी अधिकारी ने फैसला लिया कि इस कार को अहमदाबाद तक पहुंचने देना ठीक नहीं होगा. इसके बाद रास्ते में पड़ने वाली अगली पुलिस चौकी को नाकेबंदी करने के आदेश जारी कर दिए गए. कोतरपुर इलाके में इस कार को रोकने की कोशिश की गई लेकिन कार में बैठे लोगों ने पुलिसवालों पर फायरिंग कर दी. जवाब में पुलिस टीम ने भी फायरिंग शुरू कर दी और इस फायरिंग में गाड़ी में बैठे चारों कथित आतंकी मारे गए.