पठानकोट. श्रीनगर के नौगाम में मंगलवार को आतंकी हमले से लोहा लेते शहीद हुए 20 डोगरा रेजिमेंट के हवालदार मदन लाल शर्मा को गुरुवार को पूरे सैनिक सम्मान के साथ पठानकोट में उनके पैतृक गांव घरोटा में अंतिम विदाई की गई. शहीद मदन लाल को उनकी माता ने कंधा दिया और उनके ढाई साल के बेटे और पांच साल की बेटी ने उन्हें आखरी सलामी दी. 

 
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जब  शहीद मदन लाल शर्मा को उनकी मां ने कंधा दिया तो सारा माहौल गम में डूब गया और शहीद बेटे की मां की बहादुरी को देखकर सभी ने सलाम किया. वहीं गांव के लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा दिखाया और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी भी की. बेटा मदन लाल मंगलवार को कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते देश पर कुर्बान हो गए और पार्थिव शरीर जैसे ही उनका घर पहुंचा तो पूरा गांव शहीद को सलाम करने पहुंच गया. 

 
मदन लाल मंगलवार को आतंकी हमले को विफल करने के लिए अपने दल का नेतृत्व कर रहे थे. उस दिन भारतीय सेना ने नौगाम और उरी सेक्टर में आतंकी घुसपैठ के दो प्रयासों को नाकाम किया था. शहीद मदन लाल 17 साल से सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे और उनकी 2 महीने पहले ही श्रीनगर के नौगाम में पोस्टिंग हुई थी. इससे पहले वो 6 महीने यूनाइटेड नेशन्स में भी रहे थे. शहीद मदन लाल के परिवार वालों को इस बात का इंतजार  था कि वो अगले महीने नवरात्रों में अपने बेटे के मुंडन पर घर आएंगे, लेकिन ऐसा हो न सका. उससे पहले उनकी शहादत की खबर उनके घर पहुंच गई.
 
हवलदार मदन लाल की अंतिम यात्रा घर से जैसे ही शुरू हुई तो बूढ़ी मां अपने आप को न रोक पाई और बेटे को कंधा देने चली गई. अपने वीर बेटे की शहादत पर परिवार के साथ-साथ सेना को भी गर्व है. सेना इतने गुस्से में है कि अब पाकिस्तान के साथ दो दो हाथ करने की बात कह रही है. पूरा गांव शहीद मदन लाल की शहादत को सलाम कर रहा है साथ-साथ उनका परिवार भी मोदी सरकार से पाकिस्तान से बदला लेने की मांग कर रहा है. परिवार वालों ने मांग कि है कि अब समय आ गया है जब पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए.