नई दिल्ली. लंबे इंतजार के बाद फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को मंजूरी दे दी गई है. इस पर शुक्रवार को फ्रांस के रक्षा मंत्री ज्यां जीन यीव्स ली ड्रियान की ​उपस्थिति में हस्ताक्षर किए जाएंगे. ली ड्रियान गुरुवार को दिल्ली आ रहे हैं. 
 
ख़बर से जुड़ें | एंड्रॉएड ऐप्प | फेसबुक | ट्विटर
 
विमान सौदे पर हस्ताक्षर होने के 36 महीनों के अंदर यानी 2019 में विमान आना शुरू हो जाएंगे. सभी 36 विमान 66 महीनों केअंदर भारत को मिल जाएंगे. विमान सौदे को लेकर शुरुआती बातचीत 1999-2000 में हुई थी. उन दिनों वायुसेना को लड़ाकू विमानों के घटते बेड़े को लेकर चिंता थी. तब से इस सौदे पर बातचीत चल रही है. राफेल विमान फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी बनाती है.
 
यह सौदा 7.87 बिलियन यूरो यानी 59 हजार करोड़ रुपयों में हुआ है. एक विमान की कीमत 1600 करोड़ रुपये पड़ेगी. लेकिन, जब इस सौदे को लेकर बातचीत शुरु हुई थी, तो फ्रांस की कंपनी ने इसकी कीमत 12 बिलियन यूरो बताई थी. इसके बाद जब दुबारा बात हुई, तो कीमत 8.6 बिलियन यूरो तक पहुंच गई. अंतिम सौदा 7.87 बिलियन यूरो पर हुआ.
 
राफेल से बढ़ेगी ताकत 
पिछले 20 सालों में यह लड़ाकू विमानों की खरीद का पहला सौदा है. इन विमानों में अत्याधुनिक मिसाइल लगे हुए हैं, जो भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ाएंगे. इसमें मिटीओर मिसाइल होंगी. हवा से हवा में मार करने वाली मीटिओर मिसाइल होने से तिब्बत और पाकिस्तान के कई इलाके बिना सरहद पार किये भारत की जद में आ जाएंगे. 
 
मीटिओर बियॉन्‍ड विजुअल रेंज मिसाइल है और इसकी क्षमता 100 किलीमीटर से ज्यादा है. करगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के पास बियॉन्‍ड विजुअल रेंज वाले मिसाइल तो थे लेकिन उनकी रेंज 60 किलोमीटर थी. पाकिस्तान ने भी बाद में ऐसी ही मिसाइल हासिल कर ली लेकिन उनकी रेंज 80 किलोमीटर थी. अब राफेल के आने से भारतीय वायुसेना की मिसाइल पाकिस्तानी वायुसेना की मिसाइल से कहीं अधिक ताकतवर होगी.
 
इन विमानों में हवा से जमीन पर मार करने वाली स्कैल्प मिसाइलें होंगी. इनका निशाना अचूक है. इनके आने से भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल जाएगा. फ्रांस की कंपनी वायुसेना को इसका मुफ्त प्रशिक्षण भी देगी.