नई दिल्ली. बिहार के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत के खिलाफ बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि शहाबुद्दीन समाज के लिए आतंक और मुसीबत की तरह है और उसके आपराधिक रिकॉर्ड देखते हुए जमानत रद्द की जानी चाहिए.
 
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बिहार सरकार ने याचिका में कहा है कि शहाबुद्दीन को जमानत देना न्याय का मजाक बनाने जैसा है. बता दें कि 11 साल जेल में बिताने के बाद पटना हाईकोर्ट ने शहाबुद्दीन को कुछ दिनों पहले जमानत दे दी थी, जिसके बाद से ही बिहार के इस बाहुबली नेता की रिहाई पर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं. 
 
 
हाईकोर्ट ने निचली अदालत को 9 महीने में सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए थे, लेकिन 7 महीने में ही हाई कोर्ट ने निचली अदालत में केस की प्रगति को न देखते हुए जमानत दे दी. जबकि हाई कोर्ट ने जमानत देने से पहले ट्रॉयल कोर्ट से प्रगति रिपोर्ट नहीं मांगी. शहाबुद्दीन पर 40 से ज्यादा हत्या, अपहरण जैसे गंभीर क्रिमिनल केस चल रहे हैं.
 
 
आरजेडी नेता और सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के आतंक को ध्यान में रखते हुए उसे जेल में रखकर ट्रॉयल का फैसला लिया गया था. जब शहाबुद्दीन जेल में था तब कोई गवाह उसके खिलाफ नहीं आया था, और अब जब जमानत दे दी गई तब भी कोई सामने नहीं आया. सुप्रीम कोर्ट ने जेल के अंदर ट्रॉयल पर मुहर लगाई थी. बता दें कि शहाबुद्दीन के बाहर आने के बाद 20 लोगों को सुरक्षा दी गई है.