नई दिल्ली. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी दो दिन के भारत दौरे पर आज नई दिल्ली पहुंच गए हैं. गनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. मुलाकात के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि दोनों देशों ने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हिंसा और आतंकवाद का लगातार प्रयोग करने पर चिंता जताई.
 
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संयुक्त बयान में कहा गया है कि बिना किसी भेदभाव के हर तरह के आतंकवाद पर जोर देते हुए भारत और अफगानिस्तान को निशाना बनाने वाले सभी आतंकवादियों समेत आतंकियों को  संरक्षण देने वाले, मदद और सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करने पर जोर दिया गया है.
 
गनी ने मोदी से मुलाकात के बाद रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में कहा कि आतंकी संगठन भले ही बहुत तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य एक जैसा ही होता है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक सांप की तरह डंसता है. यह टलने वाला खतरा नहीं है. यह कोई एक या दो साल की बात नहीं है.
 
इस्लाम आतंक की बात नहीं करता
 
गनी ने इस्लाम का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लाम के नाम पर आतंक को बढ़ावा देना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि इस्लाम कभी भी आतंक की बात नहीं करता है. आतंकवाद को खत्म करना जरूरी है और इसके लिए हम सब को एक होना पड़ेगा.
 
पाकिस्तान का किया जिक्र
 
पाकिस्तान पर बात करते हुए गनी ने कहा कि पाकिस्तान के पास समुद्र है फिर भी वह लैंडलॉक्ड देश की तरह सोच रखता है और अफगानिस्तान एक लैंडलॉक्ड देश है, लेकिन फिर भी खुली सोच रखता है. उन्होंने इशारों में पाकिस्तान पर तंज कसते हुए कहा कि अफगानिस्तान अब एक लैंडलॉक्ड देश नहीं है, जो उसे ब्लॉक करने की कोशिश करेगा उन्हें ब्लॉक कर दिया जाएगा.
 
उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम ऐसा क्यों सोचते हैं कि भारत और अफगानिस्तान जैसे दो महान देशों के बीच व्यापार पाकिस्तान की वजह से बाधित हो सकता है, हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए.’
 
गनी ने कहा कि पाकिस्तान में एक जंग छिड़ी हुई है जिसके बारे में मीडिया में बात नहीं होती है. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में पाक के लगभग 207, 000 सैन्य टुकड़ियां तैनात हैं. वहां हो रही हिंसा को कवरेज की जरूरत है साथ ही साथ उसे रोका भी जाना चाहिए. 
 
बता दें कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी दो दिन के भारत दौरे पर हैं. भारत ने अफगानिस्तान 1 बिलियन डॉलर की मदद का ऐलान किया है.