नई दिल्ली. आज देशभर में ईद-उल-जुहा (बकरीद) मनाया जा रहा है. कई दिनों से इस त्यौहार को लेकर तैयारियां चल रही थीं और लोगों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार था. हालांकि, देश में कुछ जगहों पर कल ईद मनाई गई थी. 
 
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वहीं, कश्मीर में आज कर्फ्यू के बीच ही ईद मनाई जाएगी. घाटी के 10 जिलों में कर्फ्यू लगा हुआ है और बकरीद के मौके पर सुरक्षा को देखते हुए यहां ड्रोन और हैलिकॉप्टर से निगरानी की जाएगी. कश्मीर में लंबे समय से हिंसा का दौर जारी है.
 
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ईद-उल-जुहा की पूर्व संध्या पर सोमवार को नागरिकों को बधाई दी थी. उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह त्योहार समाज में भाईचारे, शांति एवं सौहार्द को बढ़ाने के प्रयासों को बल देगा.
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईद-उल-जुहा की बधाई दी है. उन्होंने ट्विटर पर संदेश दिया, ‘मेरी कामना है कि यह त्यौहार हमारे समाज में शांति और एकजुटता की भावना को और मजबूती प्रदान करे.’
 
कैसे मनाई जाती है बकरीद
 
मुस्लिमों में हर साल दो तरह की ईद मनाई जाती है. एक ईद-उल-फितर जिसे मीठी ईद भी कहते हैं और दूसरी ईद-उल-जुहा. ​मीठी ईद का संदेश समाज में मिठास और प्यार भरना है. वहीं, बकरीद लोगों को त्याग का संदेश देते हुए अपने कर्तव्यों का बोध कराती है. 
 
ईद-उल-जुहा का दिन फर्ज-ए-कुर्बानी का दिन माना जाता है. इसे हज की समाप्ति पर मनाया जाता है। इसके लिए पहले एक बकरे को पालते हैं और जितना संभव हो उसकी देखभाल करते हैं. जब वह बकरा बड़ा हो जाता है तो बकरीद के दिन उसकी कुर्बानी दी जाती है, जिसे फर्ज-ए-कुर्बानी कहते हैं. 
 
फर्ज-ए-कुर्बानी की कहानी
 
कुर्बानी के इस त्यौहार के पीछे त्याग और बलिदान की कहानी है. इस्लाम के अनुसार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपने सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने के लिए कहा था. तब हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देना स्वीकार किया. 
 
हजरत इब्राहिम को लगा कि कुर्बानी देेते समय बेटे को देखकर कहीं वह भावनाओं में न बह जाएं इसलिए उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध ली. जब उन्होंने कुर्बानी देने के बाद आंखें खोलीं तो पाया कि उनका बेटा जिंदा है और बेटे की जगह कटा हुआ दुंबा (सऊदी अरब में पाया जाने वाला जानवर) पड़ा है. तब से इस दिन कुर्बानी देने की प्रथा चलती आ रही है.