नई दिल्ली. बैंकों के करीब 9,000 करोड़ रुपये के कर्ज़ों को नहीं चुकाने के मामले में भारत में वांछित उद्योगपति विजय माल्या ने कहा है कि वो भारत आने को तैयार हैं. दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट को उनके वकील ने बताया है कि वो अदालत के सामने पेश इसलिए नहीं हो सकते हैं, क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है.
 
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माल्या के वकील ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया की वो भारत आना चाहते हैं पर उनका पासपोर्ट भारत सरकार ने रद्द कर दिया है जिसकी वजह से वो वापस नहीं आ पा रहे. माल्या के वकील ने कोर्ट में पेशी से छूट की अर्जी लगाई है. इसपर कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी. 
 
क्या है पूरा मामला
विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइन्स ने भारतीय बैंकों से करीब अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज लिया था. इस कर्ज को नहीं चुकाने के आरोप में विजय माल्या को ‘जानबूझकर डिफॉल्ट करने वाला’ घोषित किया गया है.
 
इसके बाद इसी साल मार्च में माल्या लंदन चले गए थे और वापस आने से यह कहकर इंकार कर दिया था. माल्या ने कहा था कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि उनके मामले में निष्पक्ष सुनवाई होगी. राज्यसभा सदस्य होने के कारण उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट (राजनयिक पासपोर्ट) था, जिसे सरकार ने अप्रैल में रद्द कर दिया था. मामले के तूल पकड़ने के बाद माल्या ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. 
 
पुराने मुकदमे की हो रही सुनवाई
पटियाला हाउस कोर्ट में माल्या के खिलाफ वर्ष 2000 में विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन करने के मामले की सुनवाई कर रही है. इसी मामले की सुनवाई में उनके वकील ने पासपोर्ट ना होने का तर्क दिया. वित्तीय अपराधों पर नज़र रखने वाले प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि उन्होंने फॉर्मूला वन रेस में अपनी कंपनी किंगफिशर का प्रचार करने की खातिर विदेशी कंपनियों को किए भुगतान के लिए ज़रूरी स्वीकृतियां नहीं ली थीं. फॉर्मूला वन रेस में वह फोर्स इंडिया टीम के मालिक हैं.
 
विजय माल्या को इंग्लैंड से निर्वासित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उनके पास वर्ष 1992 से ही वहां रेज़िडेंसी का अधिकार है.