मुंबई : भारत के टेलीकॉम सेक्टर में धूम मचा देने वाले रिलायंस की जियो कंपनी कभी इन्फोटेल के नाम से जानी जाती थी. 2010 में इस कंपनी ने पूरे देश के लिए ब्रॉडब्रैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी जीती थी.
 
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तब इसके प्रमोटर महेंद्र नहाटा और अनंत नहाटा थे. 2012 में रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी ने इसके 96 फीसद शेयर खरीद लिए और इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया. 2013 में इसका नाम जियो रख दिया गया.
तभी से देश भर में 4 जी सेवा लॉन्च करने की तैयारी चल रही थी. इस सेवा को 2015 में रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के जन्मदिन पर कंपनी के कर्मचारियों के लिए शुरू कर दिया था. बीते 5 सितंबर को 4 जी को पूरे देश में शुरू कर दिया. जिसने टेलीकॉम सेक्टर में धमाकेदार शुरुआत करते हुए 20 से 25 हजार की मार्केट वैल्यू पर कब्जा कर लिया.
45 मिनट के भाषण में करोड़ स्वाहा
इतना ही नहीं 1 सितंबर को रिलायंस की एजीएम में मुकेश अंबानी के 45 मिनट के भाषण के दौरान एयरटेल, वोडाफोन और आईडिया जैसी कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिर गए और इन कंपनियों को हजारों करोड़ का नुकसान हो गया.
शुरू हो सकता है प्राइस वार
फिलहाल देखने वाली बात यह होगी कि रिलायंस के 4 जी सिम लॉन्च होने के बाद से बाकी कंपनियां क्या रणनीति अपनाती हैं क्योंकि जिस सस्ती दर से जियो में डाटा उपलब्ध करवाया जा रहा है उससे टेलीकॉम सेक्टर में भयंकर प्राइस वार शुरू होने की उम्मीद है.