अमृतसर : अमृतसर के गुरु नानक देव सरकारी अस्पताल में मरीजों को अपना बेड किराए पर लाना पड़ता है. जी हां, पेशे से मजदूर अशोक कुमार सहित कई ऐसे मरीज हैं जिनको ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ा रहा है.
 
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पांच दिन पहले तेज बुखार से पीड़ित अशोक जब अस्पताल आए तो डॉक्टरों ने उनसे कहा कि यहां सारे बेड पहले ही भर चुके हैं इसलिए उसे खुद ही इसका इंतजाम करना पड़ेगा.
 
कोई रास्ता न देख अशोक के भाई मनोज ने 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से एक चारपाई लेना पड़ी. इतना ही नहीं इसके लिए उन्हें 1 हजार रुपए सिक्योरिटी के भी देने पड़े. हालांकि बीते शनिवार को अशोक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है.
ये सिर्फ अकेले अशोक का ही मामला नहीं है. कई ऐसे मरीज हैं जिनके परिजन बेड की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं. लेकिन अस्पताल की ओर से उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है.
इसी तरह अमरकौर नाम की एक बुजुर्ग महिला रोगी को भी अस्पताल की ओर से बेड लाने के लिए कहा गया. पीड़ित की बहू कुलबीर ने भी एक वेंडर से किराए पर बेड लिया. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाईम्स से बातचीत में कुलबीर ने कहा ‘मुझे बड़ी निराशा हुई. कोई यहां रोगियों को देखने वाला नहीं है. अकेले बहुत  सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. एक हजार रुपए सिक्योरिटी औऱ 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चारपाई का किराया देना पड़ रहा है. अस्पताल प्रशासन की ओर से चादर तक नहीं दी गई है’.
 
वहीं इस मामले में मेडिकल सुपरिडेंट राम स्वरूप शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि समस्या यह है कि उपलब्ध बेड के हिसाब से मरीजों की संख्या ज्यादा है. हमारे पास सिर्फ 900 बेड हैं. जो कि भारी भीड़ की वजह से भर गए हैं.
 
वहीं गुरुदासपुर से इलाज कराने आई कमलेश कौर ने बताया कि वह अपने साथ पहले ही दो बेड लाई हैं. लेकिन अस्पताल उन्हें अंदर घुसने ही नहीं दे रहा है.
 
बता दें कि देश के सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छिपी नहीं है. सरकारें स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर लाखों-करोड़ो खर्च करने का दावा करती हैं. जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है. अभी बीते दिनों ही खबर आई थी कि उड़ीसा में अस्पताल प्रशासन ने एक शख्स को उसकी पत्नी की लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करवाती.