वेटिकन सिटी : मानवता के लिए सच्ची मिसाल बनीं भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में संत की उपाधि दे दी गई है. रोम के सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में पोप फ्रांसिस ने टेरेसा को संत की उपाधि दी  है. 
 
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इस कार्यक्रम में पूरी दुनिया से लाखों लोग इकट्ठा हुए थे. वहीं भारत से विदेशमंत्री सुषमा स्वराज, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भारतीय प्रतिनिधिमंडल इन ऐतिहासिक पलों का गवाह बना. भारत सहित पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों ने इस कार्यक्रम को टीवी पर देखा.
 
 
आपको बता दें कि मदर टेरेसा का भारत के बंगाल राज्य से गहरा नाता रहा है. अपनी जन्मभूमि मैक्डोनिया को छोड़कर उन्होंने बंगाल को अपनी कर्मभूमि बनाया और पूरी जिंदगी वह गरीबों, जरूरतमंदों और बीमार लोगों की सेवा करती रहीं.
 
मानवता के प्रति उनके इस सच्चे सेवा भाव को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी ने नोबेल पुरस्कार से नवाजा.
 
मदर हाउस में लोगों को आए आंसू
कोलकाता में जहां पर वह रहती थीं. उस घर को आज सजाया गया था. उनके अनुनायियों के आंखो में आंसू थे. उनका कहना था कि मदर टेरेसा मां की तरह थीं. 
 
गोवा सहित पूरी भारत के चर्चो में रही रौनक
4 सितंबर को भारत में ईसाई समुदाय के लिए खास दिन बन गया. मदर टेरेसा को आज से वह संत की तरह मानेंगे. इस दिन पर गोवा सहित पूरे देश में वैसे की रौनक देखने को मिली जैसा किसी त्योहार के दौरान देखने को मिलती है.
 
मदर टेरेसा से जुड़ी कुछ बातें
1- मदर टेरेसा का जन्म मैक्डोनिया में 26 अगस्त 1910 को हुआ था.
2- मदर टेरेसा ने अपनी जिंदगी के 67 साल भारत में लोगों की सेवा में बिता दिए.
3- 1979 में उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया. 
4- जब वह इस पुरस्कार को लेकर वापस लौटीं तो उस समय के बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने उनसे कहा ‘अभी तक आप भारत की मां थीं. अब पूरी दुनिया की मां बन गई हैं.
5-  1980 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा.
6- कोलकाता को उन्होंने कर्मभूमि बनाया था.
7- कहा जाता है कि मदर टेरेसा के पास सिर्फ 3 साड़ियां थीं. पूरी जिंदगी उन्होंने इसी से काम चलाया.
8- उनका निधन कोलकाता में 5 सितंबर 1997 को हुआ था.