नई दिल्ली. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और गिलगित-बल्टिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए लोगों को मोदी सरकार जल्द 2000 करोड़ के पैकेज की घोषणा कर सकती है. एक अधिकारी ने बताया कि इस पैकेज की मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय जल्द ही पैकेज को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रख सकता है. 
 
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रिपोर्ट्स के अनुसार अगले साल होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में POK के साथ ही गिलगिट-बाल्टिस्तान के लोगों को विशेष तौर पर आमंत्रित करने पर भी विचार किया जा रहा है. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पैकेज वितरण के लिए 36,348 परिवारों की पहले से ही पहचान कर ली है. इसके तहत हरेक परिवार को साढ़े पांच लाख रुपए की राशी दी जाएगी.
 
भारत अगले साल बेंगलुरु में होने वाले प्रवासी भारतीय दिवस में POK, गिलगिट और बाल्टिस्तान के नुमाइंदों को खास तौर पर बुला सकता है. विदेश मंत्रालय में विचार-विमर्श चल रहा है कि किस तरह से दुनिया के अन्य हिस्सों में रह रहे इस क्षेत्र के लोगों से संपर्क साधा जाए और उन्हें इस मौके पर बुलाया जाए.
 
प्रवासी भारतीय दिवस में इन प्रतिनिधियों को अब नत्थी लगा हुआ वीजा दिया जाए. जैसा कि कुछ समय पहले तक चीन जम्मू-कश्मीर के लोगों को देता रहा है. नत्थी लगे वीजा का मतलब है कि भारत उस व्यक्ति के पास जिस देश का पासपोर्ट है, उसे स्वीकार नहीं करता. 
POK से आए शरणार्थी भारत के जम्मू, कठुआ और राजौरी जिलों के विभिन्न हिस्सों में आकर बस गए हैं.
 
हालांकि वे जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुसार राज्य के स्थाई निवासियों की श्रेणी में नहीं आते. कुछ परिवार 1947 में भारत के बंटवारे के समय विस्थापित हो गए और अन्य परिवार 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्धों के दौरान विस्थापित हुए थे.