चेन्नई. एक और बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने आज स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण आंध्र प्रदेश में सतीष धवन स्पेस सेंटर में किया गया, जो चेन्नई से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है. 
 
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केवल पांच मिनट के इस परीक्षण के लिए रविवार सुबह 6 बजे स्क्रैमजेट इंजन के साथ तीन टन वज़न के साउंडिंग रॉकेट RH-560 ने उड़ान भरी.​ इस सफल परीक्षण के बाद अब सेटेलाइट्स के प्रक्षेपण पर आने वाले ख़र्च में कटौती की जा सकेगी. इसकी मदद से इंधन में ऑक्सीडाइजर की मात्रा को कम किया जा सकेगा जिससे लागत कम हो जाएगी. 
 

पारंपरिक रॉकेट इंजन में ईंधन और आॅक्सीडाइजर दोनों ही रखने होते थे. लेकिन, अब जब रॉकेट अपनी सुपरसॉनिक स्पीड में होगा तो स्क्रैमजेट इंजन अपनी एयर-ब्रीदिंग प्रोपलशन सिस्टम तकनीक से वायुमंडलीय आॅक्सीजन को सम्पीड़ित (कंप्रैस) कर सकेगा. ऐसे में वायुमंडलीय आॅक्सीजन ईंधन को जलाने के लिए एक आॅक्सीडाइजर के तौर पर काम करने लगेगी.

इसरो ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है. स्क्रैमजेट इंजन का प्रयोग सिर्फ रॉकेट के वायुमंडलीय चरण के दौरान ही होता है. वहीं, भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-एमके द्वितीय) के साथ मौसम उपग्रह इनसैट-3डीआर का प्रक्षेपण सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.