नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन का एजेंडा वैसे तो गरीबों का कल्याण रखा गया था लेकिन असली चिंता वोट और नोट की हुई. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से दो टूक कह दिया कि चुनावों की जिम्मेवारी मुख्यमंत्रियों को लेनी होगी और वोट के साथ-साथ नोट भी जुटाने होंगे.
 
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अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि 2017 से 2019 तक लगातार महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा के चुनाव होंगे जहां की जिम्मेवारी मुख्यमंत्रियों को लेनी होगी. शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा कि उन्हें चुनाव में पार्टी के लिए वोट तो लाना ही है, साथ ही चुनाव खर्च के लिए चंदा यानी नोट भी जुटाना होगा.
 
अमित शाह ने BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी जिसमें राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को छोड़कर सभी भाजपाई मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और गठबंधन सरकारों में BJP के वरिष्ठ मंत्रियो ने हिस्सा लिया.
 
बैठक का एजेंडा तो गरीबों का कल्याण और विकास रखा गया था लेकिन एक सत्र समाप्त होते ही सारा एजेंडा बदलकर वोट और नोट की चिंता से घिर गया. पार्टी ने मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ मंत्रियों की 3 टीम बना दी है. 2 टर्म से ज्यादा अनुभव वाले CM की टीम में रमन सिंह और शिवराज सिंह चौहान जैसे नेताओं को रखा गया है.
 
दूसरी टीम में नए मुख्यमंत्रियों को रखा गया है जिसमें देवेंद्र फड़नवीस, मनोहरलाल खट्टर जैसे नेता शामिल हैं. तीसरी टीम उन मुख्यमंत्रियों की बनाई गई है जिनके राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इनमें गुजरात के विजय रूपानी, गोवा के लक्ष्मीकांत पारसेकर जैसे नेता शामिल हैं. पंजाब के BJP मंत्रियों को भी इसी समूह में रखा गया है.
 
शाह ने BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आगामी 2 साल में होने वाले उत्तर प्रदेश समेत एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए फंड जुटाने के भी निर्देश दिए है.